रिटायर्ड IAS भास्कर खुलबे और अमरजीत सिन्हा बने PM मोदी के सलाहकार…दोनों 1983 बैच के हैं आईएएस अफसर….एक बिहार तो दूसरे बंगाल कैडर के

नई दिल्ली 22 फरवरी 2020 रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों भास्कर खुलबे और अमरजीत सिन्हा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार नियुक्त किया गया है. शुक्रवार को एक सरकारी आदेश में इस बात की जानकारी दी गई. इसमें कहा गया है कि दोनों अधिकारियों को ‘कैबिनेट की नियुक्ति समिति’ (ACC) ने सेक्रेटरी के बराबर पद पर प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है.

सरकारी आदेश के मुताबिक दोनों अधिकारियों का शुरुआती कार्यकाल दो साल का होगा. नियुक्तियों को अनुबंध के आधार पर किया गया है. अगले आदेश आने तक ये दोनों अपने पद पर बने रहेंगे. साथ ही कहा गया है कि सरकार में सचिव स्तर के पुन: नियोजित अधिकारियों के मामले में लागू नियम और शर्तें उन पर लागू होती हैं.

भास्कर खुलबे 1983 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर से आईएएस अधिकारी हैं. वह मूलरूप से अल्मोड़ा के भिकियासैंण और नैनीताल के रहनेवाले हैं. प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार जैसे अहम पद पर पहुंचने वाले खुल्बे इस क्षेत्र के पहले आईएएस हैं. वह पहले भी पीएमओ में अपनी सेवा दे चुके हैं.

भास्कर खुलबे पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के करीबी अधिकारी रहे. उनके साथ भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई हुई हैं.

भास्कर ने भिकियासैंण से प्राथमिक और फिर 1979 में डीएसबी से उच्च शिक्षा ग्रहण की है. उनके पिता स्वर्गीय ख्यालीराम खुलबे ठेकेदार थे. तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के ऊपर उनका निवास था. भास्कर खुलबे की पत्नी मीता खुलबे भी आईएएस अधिकारी रहीं. बेटा प्रतीक आईटी दिल्ली में है.

कॉलेज के दिनों में से ही वह कविता और भाषण जैसी रचनाएं करते रहते हैं. उनके पढ़ने-लिखने और कठिन मेहनत को लेकर उनके समकालीन उनकी काफी तारीफ करते हैं.

नक्सली इलाकों में काम कर चुके हैं सिन्हा

अमरजीत सिन्हा भी 1983 बैच के ही आईएएस अधिकारी हैं. वह बिहार कैडर से थे. सिन्हा पिछले साल ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. सिन्हा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं का हिस्सा रहे हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में टॉप रहे और नेशनल टैलेंट, रोड्स और ऑक्सफोर्ड कैंब्रिज सोसायटी स्कॉलरशिप पाने वाले सिन्हा का छात्र जीवन शानदार रहा है. उन्होंने सैकड़ों आलेख और कई किताबें लिखी हैं. एजुकेशन और पब्लिक हेल्थ विषय पर उनकी खास पकड़ है. बिहार और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करने का भी उनका अनुभव है.

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