भीषण गर्मी से मिलेगी राहत: मानसून समय से पहले दे सकता है दस्तक…. मौसम विभाग ने दिया संकेत, इस राज्य में दो दिन बारिश के आसार

नईदिल्ली 29 मई 2020। अरब सागर में जल्द ही एक निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होने वाला है। यही सिस्टम मॉनसून को केरल में लेकर आएगा। इससे पहले दक्षिण-पूर्वी अरब सागर पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र सक्रिय है। वर्तमान सक्रिय चक्रवाती क्षेत्र के चलते केरल लक्षद्वीप और तटीय कर्नाटक में बारिश के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई है कुछ स्थानों पर बारिश हो भी रही है।

गुरुवार (28 मई) की शाम देश के कई राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश की फुहार देखने को मिली जिसके बाद मौसम सुहाना हो गया। बारिश और तेज हवा के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली। एक पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में यह बदलाव आया है। इसकी वजह से तापमान में 6 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई।

आईएमडी ने आगामी दिनों में धूलभरी आंधी, गरज के साथ बारिश का अनुमान जाहिर किया है। विभाग के मुताबिक, शुक्रवार और शनिवार को भी कुछ जगहों में धूलभरी आंधी और गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। तेज हवाएं भी चल सकती हैं। विभाग के मुताबिक, एक जून तक उत्तर पश्चिम भारत में मौसम अच्छा रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि केरल तट पर मौसमी गतिविधियां काफी अनुकूल हैं। दक्षिणी-पश्चिमी मानसून केरल में 1 जून को दस्तक दे सकता है।

मौसम विज्ञान विभाग ने अगले दो दिन तक पश्चिम बंगाल में बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। कोलकाता समेत राज्य के कई जिलों में गुरुवार को भी आसमान में बादल छाए हुए थे और रुक-रुक कर बारिश हो रही थी। मौसम विभाग के मुताबिक आज (शुक्रवार को)  उत्तर 24 परगना, पूर्व और पश्चिम वर्धवान, मुर्शीदाबाद और बीरभूम जिलों में शनिवार तक तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने और बारिश की संभावना है। हवाओं की गति 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है।

बारिश: बारिश की बात करें तो पूर्व निर्धारित 14 स्थानों पर 60% क्षेत्र में लगातार दो दिन 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होने पर केरल में मानसून के आगमन की घोषणा की जाती है। यह 14 स्थान हैं मिनिकॉय, अमिनी दिवी, तिरुवनंतपुरम, पुनालुर, कोल्लम, अलपुझा, कोट्टायम, कोच्चि, त्रिशूर, कोझीकोड, थालास्सेरी, कन्नूर, कुडुलु और मैंगलोर।

हवाबारिश के अलावा हवाओं में स्थायी बदलाव भी एक प्रमुख मापदंड है। पश्चिम से आने वाली हवाओं की गहराई क्षेत्र विशेष (55° से 80° पूर्वी देशांतर और 0° से 10° उत्तरी अक्षांश) में 600 मिलीबार (7000 फुट की ऊंचाई पर) के आसपास होनी चाहिए। इन हवाओं की रफ्तार उक्त क्षेत्र में 925 मिलिमीटर यानि 3000 फुट की ऊंचाई पर 25 से 35 किमी प्रति घंटे से अधिक होनी चाहिए।

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