किसान आंदोलन का सबसे चर्चित नाम है राकेश टिकैत……दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर रह चुके राकेश अब तक 44 बार जा चुके हैं जेल…. MA और LLB तक की पढ़ाई कर चुके इस चर्चित नेता के बारे में जानिये

नयी दिल्ली 29 जनवरी 2021। देश की राजधानी की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। लगातार सरकार दवाब बना रही है, लेकिन किसान अपने आंदोलन से झुकने को तैयार नहीं है। किसानों आंदोलन में एक सबसे चर्चित चेहरा राकेश टिकैत का है। राकेश टिकैत किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, वो सबसे कद्दावर किसान नेता है। देश के सबसे बड़े किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर रह चुके हैं और किसानों के आंदोलन की वजह से अब तक 44 बार जेल जा चुके हैं….आइये जानते हैं उनके बारे में….

देश के चर्चित किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के चार बेटों में राकेश दूसरे नंबर के हैं। महेंद्र सिंह टिकैत के सबसे बड़े बेटे नरेश टिकैत हैं, जो मौजूदा समय में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, दूसरे नंबर पर राकेश टिकैत, जो किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. तीसरे नंबर पर सुरेंद्र टिकैत और तीसरे नंबर पर सुरेंद्र टिकैत हैं, जो मेरठ के एक शुगर मिल में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं. वहीं, सबसे छोटे बेटे नरेंद्र टिकैत खेती का काम करते हैं.

राकेश सिंह टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ था. उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की है. उसके बाद एलएलबी किया. राकेश टिकैत की शादी साल 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई थी. इसी साल उनकी नौकरी दिल्ली पुलिस में लगी थी. इनके एक पुत्र चरण सिंह और दो पुत्री सीमा और ज्योति हैं. इनके सभी बच्चों की शादी हो चुकी है.

के बड़े बेटे नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन में ही सक्रिय थे, लेकिन राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर 1985 में भर्ती हुए थे, लेकिन बाद में प्रमोशन होकर सब इंस्पेक्टर बन गए थे. इसी दौरान 90 के दशक में दिल्ली के लाल किले पर महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन चल रहा था.

ऐसे में सरकार की ओर से राकेश टिकैत पर पिता महेंद्र सिंह टिकैत से आंदोलन खत्म कराने का दबाव बना. ऐसे में राकेश टिकैत उसी समय पुलिस की नौकरी छोड़ किसानों के साथ खड़े हो गए थे. इसके बाद से ही किसान राजनीति का हिस्सा बन गए और देखते ही देखते ही महेंद्र सिंह के किसान सियासत के वारिस के तौर पर उन्हें देखा जाने लगा.

पिता महेंद्र सिंह टिकैत की कैंसर से मृत्यु के बाद राकेश टिकैत को उनका वारिस माना जा रहा था. 15 मई 2011 को लंबी बीमारी के चलते महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के बाद बड़े बेटे चौधरी नरेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाकर कमान सौंप दी गई और राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभाते रहे. महेंद्र सिंह टिकैत बालियान खाप से आते थे. इसी चलते उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया, क्योंकि खाप के नियमों के मुताबिक बड़ा बेटा ही मुखिया हो सकता है.

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