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दैनिक भास्कर ग्रुप पर छापा : IT-ED ने दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, गुजरात और महाराष्‍ट्र में भास्कर ग्रुप पर की रेड….. इधर सदन में छापे को लेकर हंगामा, कई बड़े नेताओं ने किया ट्वीट

नई दिल्ली 22 जुलार्ई 2021। दैनिक भास्‍कर ग्रुप के कई दफ्तरों में इनकम टैक्स और ईडी ने छापा मारा है। भास्कर ग्रुप पर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का आरोप है। दैनिक भास्‍कर के दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, गुजरात और महाराष्‍ट्र के ऑफिस परिसरों की तलाशी चल रही है। वहीं ग्रुप के प्रमोटर्स के घरों और ऑफिसों पर भी छापेमारी की गई. छापे के बाद अब राजनीति गरमा गयी है। आज सदन में भी इस मामले को लेकर हंगामा हुआ। वहीं कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले में ट्वीट किया है।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि भास्‍कर ग्रुप ने सरकार के ‘कोविड कुप्रबंधन को लेकर रिपोर्टिंग की थी, इसलिए ये छापे मारे गए. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘अपनी रिपोर्टिंग के जरिये दैनिक भास्‍कर ने मोदी सरकार के कोविड-19 महामारी के ‘कुप्रबंधन’ को उजागर किया था, इसकी कीमत उसे चुकानी पड़ रही है. अघोषित आपातकाल जैसा कि अरुण शौरी ने कहा है-यह मोडिफाइड इमरजेंसी है।

‘सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग समूह की तरफ से दिए गए दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं था। इसके बाद कर चोरी मामले की जांच के लिए यह छापेमारी की गई है। आयकर विभाग की तरफ से इसे लेकर कोई अधिक जानकारी नहीं दी गई है। ऑफिसों के बाहर पुलिस का पहरा भी मौजूद है। किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। साथ ही कोई बाहर भी नहीं निकल सकता है। आयकर विभाग की टीम के साथ सीआरपीएफ के जवान भी मौजूद हैं।

देश के सबसे बड़े अखबार समूहों में से एक, दैनिक भास्‍कर ने अप्रैल-मई माह में कोविड-19 की दूसरी लहर में बड़े पैमाने पर तबाही की मुखरता से रिपोर्टिंग की थी.भास्कर ने कोरोना महामारी के दौरान आधिकारिक दावों पर आलोचनात्मक रुख वाली रिपोर्टों की एक सीरीज प्रकाशित की थी, इसमें ऑक्‍सीजन, हॉस्पिटल बेड और वैक्‍सीन की कमी के कारण लोगों को हुई भारी परेशानी को हाईलाइट किया गया था.इसकी कवरेज ने यूपी और बिहार के कस्‍बों में गंगा नदी में तैरते कोविड प्रभावितों के शवों की भयावह स्थिति को उजागर किया था, संभवत: शवों के अंतिम संस्‍कार करने के लिए साधनों की कमी के कारण ऐसा किया गया. रिपोर्टिंग में यूपी में गंगा नदी कि किनारे पर उथली कब्रों में दफन शवों के बारे में भी खुलासा था.

करीब एक माह पहले, न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने दैनिक भास्‍कर के संपादक ओम गौड़ की भारत में कोविड के कारण हुई मौतों को लेकर ऑप-एड (op-ed) इस शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था, ‘गंगा शवों का लौटा रही है, यह झूठ नहीं बोलती । इसमें कोरोना के चरम पर होने के दौरान स्थिति को नियंत्रण करने के मामले में सरकार की आलोचना की गई थी. उन्‍होंने लिखा था, ‘देश की पवित्र नदियों मोदी प्रशासन की नाकामियों और धोखे का प्रदर्शन बन गई हैं.’

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