तरकश : जब सीएस फंसे मुश्किल में

संजय के दीक्षित
तरकश, 29 नवंबर 2020

छत्तीसगढ़ के चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल को पुलिस ने पकड़ लिया…सहसा ये बात जरा हजम नहीं होती! लेकिन, ऐसा हुआ। पुलिस थी मुंबई की। दरअसल, हुआ ऐसा कि मंडल कुछ दिन पहले निजी दौरे पर एक दिन के लिए मुंबई गए थे। वहां उन्होंने सांताक्रुज थाने की बिल्डिंग देखकर कार रोकवाई और मोबाइल से फोटो क्लिक कर दी। फोटो लेने के बाद वे आगे बढ़ गए। करीब दो किलोमीटर का फासला तय किए होंगे कि मुंबई पुलिस की मोबाइल यूनिट ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक करके रोक लिया। जाहिर है, 26 नवंबर की आतंकवादी घटना के बाद मुुंबई पुलिस अलर्ट रहती है। लिहाजा, मोबाइल वेन से उतरे एएसआई ने सीएस की क्लास ले ली। मंडल ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की…मैं छत्तीसगढ़ का चीफ सिकरेट्री हूं। मगर टीशर्ट और स्पोर्ट्स शू पहने एएसआई मंडल को सीएस मानने के लिए तैयार नहीं था। बोला, चलो थाने। मंडल को लगा मामला अब गड़बडा रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र के एसीएस होम को फोन लगाया। फोन रिसीव नहीं हुआ। फिर, वहां के चीफ सिकरेट्री को। चीफ सिकरेट्री ने फोन पिक कर लिया। माजरा समझने के बाद सीएस ने एएसआई को डांट लगाई…तुम जानते हो ये आदमी कौन है। इसके बाद एएसआई ने मंडल से क्षमा मांगी और उन्हें जाने दिया। बता दें, राजधानी के कोतवाली थाने का जीर्णोद्धार मंडल ने कराया है, उसमें सांताक्रुज थाने की कुछ झलक मिलती है। बताते हैं, मंडल ने फोटो भी इसीलिए क्लिक किया था।

तीसरे सीएस

आरपी मंडल की बिदाई के बाद अब अमिताभ जैन का सूबे का प्रशासनिक मुखिया बनना लगभग निश्चित हो गया है। 89 बैच के आईएएस अमिताभ छत्तीसगढ़ के तीसरे माटी पुत्र सीएस होंगे। उनसे पहिले विवेक ढांड और अजय सिंह चीफ सिकरेट्री रह चुके हैं।

लास्ट ओवर में छक्का

सीएस आरपी मंडल को भारत सरकार से एक्सटेंशन नहीं मिल पाया। ऊपर से मिले संकेतों के बाद भूपेश कैबिनेट ने आज उन्हें बिदाई दी। मंडल को लगता है, इसका अहसास हो गया था। आखिरी ओवर में उन्होंने सहवाग टाइप धुंआधार पारी खेलकर राजधानी रायपुर को आधा दर्जन से अधिक सौगातें दे डाली। वैसे भी रायपुर को रायपुर बनाने में मंडल का बड़ा योगदान रहा है, ये उनके विरोधी भी मानते हैं। मरीन ड्राइव, केनाल रोड, कलेक्ट्रेट, कलेक्ट्रेट गार्डन, केनाल रोड, वीआईपी रोड, ग्लोबल चौक, बूढ़ा तालाब जैसे कई काम उनके खाते में हैं।

कलेक्टर्स भी

नए चीफ सिकरेट्री की पोस्टिंग के साथ संकेत हैं, कुछ कलेक्टरों का आदेश भी सरकार निकाल सकती है। खासकर, दो-तीन कलेक्टरों के कामकाज से सरकार खुश नहीं है। सरकार के ड्रीम प्रोजक्ट नरवा, गरूवा में उनके जिलों में कुछ भी काम नहीं हुआ हैं। मुहल्ला क्लिनिक पर भी दो-तीन जिलों के कलेक्टर समुचित ध्यान नहीं दे रहे। जाहिर है, नेतागिरी से बचाने सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन का काम नगरीय प्रशासन विभाग को देने की बजाए कलेक्टरों को दिया कि इसमें कोई तीन-तिकड़म न हो पाए। लेकिन, कुछ कलेक्टरों की शिकायत मिल रही है कि इस योजना पर वे गिद्ध नजर रख रहे हैं।

मंत्री को झटका?

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के लिए नगरीय प्रशासन और श्रम मंत्री शिव डहरिया ने कर्मकार मंडल से 55 करोड़ रुपए दिया। लेकिन, मंत्री के हाथ आया कुछ भी नहीं। यह योजना नाम के लिए जरूर नगरीय प्रशासन के पास है। मगर इस पर पूरा नियंत्रण कलेक्टरों के पास है। इस योजना के संचालन के लिए सोसाईटी बनाई गई है, उसके चेयरमैन कलेक्टर हैं। नगर निगमों के कमिश्नर सोसाईटी के सचिव होंगे। अब जहां कलेक्टर चेयरमैन हैं, वहां समझ सकते हैं निगम कमिश्नर की कितनी चलेगी। हालांकि, यह योजना प्रारंभ होते ही हिट हो गई है। इससे इसका पता चलता है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट से 32 दिनों में 40 हजार से अधिक लोगों ने इलाज कराया है। उपर से, मुहल्ला क्लिनिक से अपढ़ झोला छाप चिकित्सकों का क्लिनिक बैठता जा रहा है। झोला छाप डाक्टर सामान्य सा सर्दी, बुखार के लिए 100 रुपए ऐंठ लेते हैं। मोबाइल यूनिट में पैथालाॅजी टेस्ट के साथ दवाइयां भी मुफ्त में मिल जा रही। ऐसे में, इस योजना को हिट होनी ही थी।

किस्मती बैच

डिप्टी कलेक्टरों का 2005 बैच किस्मती निकला। डीपीसी में उपर के सभी सात अफसरों को आईएएस अवार्ड पर लगभग मुहर लग गई है। भारत सरकार ने डीपीसी के बाद प्रोसिडिंग स्टेट गवर्नमेंट के बाद औपचारिक सहमति के लिए भेज दिया है। यहां से ओके होेते ही आईएएस अवार्ड का नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। यानी सातों डिप्टी कलेक्टर आईएएस बन जाएंगे। छत्तीसगढ़ का ये पहला बैच होगा, जो 10 साल में आईएएस बन जाएगा। वो ऐसे कि डिप्टी कलेक्टर्स से आईएएस अवार्ड होने में करीब पांच साल पुराना बैच अलाॅट होता है। मसलन, 2020 में आईएएस अवार्ड हुआ है तो 2015 या 16 बैच मिलेगा। 2005 बैच को अगर आईएएस का 2015 बैच मिलेगा तो 10 साल ही हुआ।

आयोग में वैकेंसी

सरकार लाल बत्ती की दूसरी लिस्ट निकालने जा रही है। इनमें राजनीतिज्ञों को एडजस्ट किया जाएगा। उधर, सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के दो पद खाली हो गए है। इस पर कई रिटायर नौकरशाहों की नजर गड़ी हुई है। आयोग से पहले सूचना आयुक्त एके सिंह रिटायर हुए और अब मोहन पवार। जाहिर है, सरकार को अब दोनों पदों को भरना होगा। आयोग में अभी सूचना आयुक्त के नाम पर सिर्फ अशोक अग्रवाल बचे हैं। उनसे उपर मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत।
अंत में दो सवाल आपसे?

  1. किस आईएएस की वसूली अभियान से सरकार दुखी है और नाराज भी ?
  2. आरपी मंडल की पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग एनआरडीए में मिलेगी या नगरीय प्रशासन में ?
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