आज के दौर में खुद को सुरक्षित रखना पहली प्राथमिकता….गुरू पूर्णिमा की पूर्व संध्या बाबा संभव राम जी का आशीर्वचन

पड़ाव (वाराणसी), 5 जुलाई 2020। कोविड-१९ के बढ़ते प्रसार को देखते हुए इस वर्ष श्री सर्वेश्वरी समूह के प्रधान कार्यालय व इसकी शाखाओं में गुरुपूर्णिमा पर्व पूर्व वर्षों की भांति नहीं मनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में सभी श्रद्धालु व भक्तजन अपने-अपने घरों में ही गुरुपूजन करेंगे। परम्परानुसार समूह के प्रधान कार्यालय अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में गुरुपूर्णिमा की पूर्व संध्या पर होने वाला पत्रकार सम्मलेन भी नहीं हो सका, परन्तु भक्तों व शिष्यों के हितार्थ पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी (अध्यक्ष श्री सर्वेश्वरी समूह) ने वर्तमान परिस्थितियों पर एक संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि-

आज का समय विषम है हम सभी लोग इससे परिचित हैं, जान रहे हैं। इस समय मैं तो यही कहना चाहूँगा कि पहले हमलोग अपने-आपको सुरक्षित रखें। क्योंकि जब तक हम सुरक्षित नहीं रहेंगे और जब हम कल रहेंगे ही नहीं, देखेंगे ही नहीं तो हमलोग कुछ कर नहीं पायेंगे। यह जो मनुष्य शरीर है इसी से सब साधा जाता है। इस आकृति में ही उस कृति को साधा जाता है। मनुष्य-शरीर जो देव-दुर्लभ कहा गया है, देवता भी तरसते हैं कि मनुष्य शारीर में जन्म हो, क्योंकि इसी से मुक्ति के द्वार खुलते हैं।

हमारे ग्रंथों में परमपूज्य अघोरेश्वर भी कहे हैं, उसमें पहले ही संकेत दिया हुआ था कि हम अपने-आपको इन सभी आक्रमणों से बचा ले जायँ तो यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। इस आक्रमण से जो भी बचे रहेंगे वही हम सबका जो बचेगा उसको लेकर आगे जायेंगे। यह भी है हमारे ग्रंथों में कि आने वाले समय में सबकी आँख में आँसू होगा, कोई ऐसी आंख नहीं होगी कि जिसमें आँसू न हो। जो एक चक्र बना है, बन रहा है, उसके बाद फिर वह समय भी उपस्थित होगा कि सब शांति में तब्दील हो जायेगा। तब तक यदि हम अपने-आपको बचा के रख सके, तो हमारे इस मानव जीवन की सार्थकता होगी, हमारा बहुत बड़ा उद्धार होगा।

इसीलिए मैं आप सभी लोगों से निवेदन करूँगा कि इस गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर आप सभी लोग अपने गृह में रहकर जिस तरह की आपकी श्रद्धा है, अर्पित करना है, उपासना है, वहीँ रहकर उसको पूर्ण करें क्योंकि गुरु बहुरंगी सर्वसंगी है। उस सर्वव्यापी को आपके मन की बात या आपकी प्रार्थना जो आप मौन रहके करते हैं वह ज्यादा सुनी जाती है। और जिसको चिल्ला-चिल्लाकर किया जाता है या दिखावा करके करते हैं वह शायद न उतनी सुनी जाय। तो हम अपने-आपमें, अपने अभ्यंतर में अपने उस इष्ट को, अपने गुरु को याद कर लें, यही आज के समय-काल-परिस्थिति के अनुकूल होगा जो हमें बचाए रखेगा। जब हम सुरक्षित रहेंगे तभी हम कल की ओर, अपने आगे की ओर कुछ करने में सक्षम होंगे। तो अभी सबसे आवश्यक यही है कि जो आपके शासक-प्रशासक, चिकित्सकगण और सज्जन लोग जो कह रहे हैं कि हम अपने-आपको बचाए रहें, यही मुख्य है।

इसके अलावे कोई रास्ता भी हमारे पास नहीं है। आज का कर्म कल का भविष्य। नहीं तो हम जैसा देख रहे है कि सबके बातों की, सभी चेतावनियों की उपेक्षा हो रही है, सावधान रहने को कहा जा रहा है, लेकिन असावधान होकर घूम रहे हैं। ऐसे में यह नहीं चलेगा। हमको सतर्क रहना होगा, अपनी बुद्धि-विवेक से काम लेना होगा। और कुछ समय के लिए मोह-माया से भी दूर रहना होगा। हमलोग जहाँ रहें, सुरक्षित रहें, कम-से-कम बाहर जायँ। यही मैं निवेदन करूँगा आपलोगों से कि आपलोग वहीँ से प्रार्थना कर लेंगे। आपलोगों से विदा लेता हूँ। जय माँ सर्वेश्वरी।

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