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प्रो0 चक्रवाल बोले, राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें प्रयोगशाला से जमीनी ज्ञान की ओर जाने के लिए प्रेरित करेगी, निष्ठा, लगन, निरंतरता और अनुशासन से लक्ष्य हासिल करना आसान, प्रो0 सिंह ने कहा, नैनो टेक्नोलॉजी पर संगोष्ठी शोध, अनुसंधान के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगी

बिलासपुर, 21 सितंबर 2021। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए हम सभी को अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य करना है। नैनोसाइंस, नैनोटेक्नालॉजी एंड एडवांस मटेरियल्स विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी व कार्यशाला […]

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प्रो0 चक्रवाल बोले, राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें प्रयोगशाला से जमीनी ज्ञान की ओर जाने के लिए प्रेरित करेगी, निष्ठा, लगन, निरंतरता और अनुशासन से लक्ष्य हासिल करना आसान, प्रो0 सिंह ने कहा, नैनो टेक्नोलॉजी पर संगोष्ठी शोध, अनुसंधान के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगी
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बिलासपुर, 21 सितंबर 2021। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए हम सभी को अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य करना है।
नैनोसाइंस, नैनोटेक्नालॉजी एंड एडवांस मटेरियल्स विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी व कार्यशाला के अवसर पर प्रो0 चक्रवाल बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें ज्ञान अर्थव्यवस्था (नॉलेज इकॉनोमी) के रूप में स्थापित होने के लिए बेहतर शोध एवं नवाचार संपादित करने होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला नैनो मटेरियल्स पर शोध के विकास को नया आयाम देगी।
प्रो. चक्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हमें प्रयोगशाला ज्ञान से जमीनी ज्ञान की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ स्वतंत्रता प्रदान करती है कि हम अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि लक्ष्य निर्धारण के बाद दिशा, निष्ठा, लगन, अनुशासन, समर्पण एवं निरंतरता के गुण के साथ एकाग्रचित भाव से प्रयास करने पर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. एन.एल. सिंह, एमएस विश्वविद्यालय बड़ौदा गुजरात ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय समाचीन होने के साथ भौतिकी के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी नैनोमटेरियल्स की सदी बनने जा रही है। इस तकनीक के माध्यम से बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। इस तकनीक के प्रयोग से किसी वस्तु को छोटे आकार के साथ मजबूत व हल्का बनाया जा सकता है। नैनो तकनीक विकसित करने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं। ऐसे में यह संगोष्ठी शोध, अनुसंधान के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगी।
विशिष्ट अतिथि प्रो. डीजी कुबेरकर सौराष्ट्र विश्वविद्यालय राजकोट ने कहा कि कुलपति प्रो. चक्रवाल के सक्षम नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि नैनोसाइंस, नैनो टेक्नालॉजी एवं एडवांस मटेरियल्स के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों में जहां भी आवश्यकता होगी मैं हमेशा सहयोग के लिए तत्पर रहूंगा।
संगोष्ठी में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास अमेरिका की प्रो. माया नायर, जोहांसबर्ग विश्वविद्यालय दक्षिण अफ्रीका के प्रो. टी. पाल, प्रो. नीरज मिश्रा एमिटी विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश एवं अन्य देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्र में व्याख्यान प्रस्तुत किया।
धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संजोयक व शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. अरूण कुमार सिंह एवं कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव एवं रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुभाष बनर्जी ने किया। कार्यक्रम में विद्यापीठों के अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्षों के साथ शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मिश्रित माध्यम से शामिल हुए।

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