प्रान खाता ले रहा शिक्षकों का प्राण , संविलियन के बाद वेतन मिलने में होगी परेशानी…. अभी भी शिक्षकों को हो रहा भारी आर्थिक नुकसान…..स्थानीय कार्यालयों की लापरवाही की सजा भोग रहे शिक्षक

रायपुर 18 मई 2020। शासकीय कर्मचारियों की अंशदायी पेंशन योजना की राशि को जिस खाते में रखा जाता है उसे प्रान अकाउंट कहते हैं जो ऐसे तो कर्मचारियों के लिए राहत देने वाला है लेकिन प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए यह फिलहाल मुसीबत का कारण बना हुआ है, वजह यह है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद स्थानीय कार्यालयों कि लापरवाही और निरंकुशता के चलते शिक्षकों का प्रान अकाउंट बन ही नहीं पाया है और जिन शिक्षकों का प्रान अकाउंट बन भी गया है उनके खाते में भी नियमित तौर पर पैसे नहीं डाले जा रहे हैं जबकि शिक्षकों के अकाउंट से नियमित तौर पर हर माह पैसे काटे जा रहे हैं कुल मिलाकर यह पैसों का बंदरबांट है जिसकी कीमत अंत में शिक्षक को ही चुकानी पड़ रही है।

1 जुलाई 2020 को जिन शिक्षकों का संविलियन होना है वह इसे लेकर सबसे ज्यादा परेशान है क्योंकि प्रान अकाउंट न होने की स्थिति में शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पाएगा और 1 जनवरी 2020 को संविलियन हुए शिक्षकों ने इस समस्या को खूब झेला है और कई शिक्षकों को तो अभी तक वेतन नहीं मिला है ।

शासन की योजना के अनुसार कर्मचारियों के वेतन से 10% की राशि की कटौती होती है और इतनी ही राशि सरकार अपने हिस्से से प्रान अकाउंट में डालती है । अब जिन शिक्षकों का प्रान अकाउंट बना ही नहीं है उनके खाते से न तो कटौती हो रही है और न उन्हें सरकार वाला हिस्सा मिल रहा है जो सीधे तौर पर उनका बड़ा नुकसान है इसी प्रकार जिन शिक्षकों का प्रान अकाउंट बन गया है और उनके खाते में पैसे नहीं डाले जा रहे हैं जबकि वेतन से उनके हर माह कटौती हो रही है उन्हें सीधे सीधे ब्याज का नुकसान हो रहा है और यह सब जिले के स्थानीय कार्यालयों की लापरवाही के चलते हो रहा है जिसके विरुद्ध कई बार आवाज उठाने के बावजूद स्थानीय अधिकारी कान बंद करके बैठे हुए हैं ।

शिक्षकों के आवेदन देने के बाद भी नही बना रहे है प्रान – विवेक दुबे

शिक्षकों के लिए अंशदायी पेंशन योजना 2012 के बाद से जारी है बावजूद इसके कई शिक्षक ऐसे हैं जो 2012 या 2013 से सेवा दे रहे हैं और कई बार आवेदन देने के बावजूद स्थानीय कार्यालयों ने उनका प्रान अकाउंट जेनरेट नहीं किया है , इसके लिए शिक्षक कई बार फॉर्म भर कर दे चुके हैं और स्थानीय अधिकारियों को आवेदन सौंपकर गुहार भी लगा चुके हैं यदि अभी भी प्रान अकाउंट जनरेट नहीं होता है तो जुलाई के बाद वेतन मिलने में परेशानी होगी इसे लेकर शिक्षकों में चिंता है । इसमें पूरी गलती केवल और केवल स्थानीय अधिकारियों की है और इसका पूरा खामियाजा शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है क्योंकि सरकार के अंशदान का हिस्सा उन्हें नहीं मिल पा रहा है । इधर कई कार्यालयों से यह भी सुझाव दिए जा रहे हैं कि संविलियन के समय आपका प्राण अकाउंट बन जाएगा लेकिन पंचायत विभाग में नौकरी करते समय सरकार का जो अंशदान उन्हें मिलना था उस राशि की भरपाई कैसी होगी इसका कोई जवाब उनके पास नहीं है ।

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