विष्णुदेव और ओपी की जुगलबंदी, वर्ष 2026-27 का बजट...
कृषक परिवार में जन्मे विष्णुदेव साय ने पंच, सरपंच से लेकर विधायक, सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री के बाद 2023 में प्रदेश के मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला है...

उज्जवल दीपक, बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता: जशपुर जिले के एक गाँव बगिया से एक कृषक परिवार में जन्मे विष्णुदेव साय ने पंच, सरपंच से लेकर विधायक, सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री के बाद 2023 में प्रदेश के मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला है। गाँव, गरीब, किसान, जनजातीय समुदाय की समस्याओं से खुद संघर्ष करने वाले, इस प्रभावशाली राजनैतिक अनुभव का सीधा फायदा आज छत्तीसगढ़ की जनता को मिल रहा है और छत्तीसगढ़ राज्य के बजट में यह परिलक्षित होता है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी बाल्यकाल में अपने पिता के निधन के बाद, जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर खड़े थे । परिस्थितियाँ कहती थीं कि एक सरकारी नौकरी स्वीकार कर लो, परिवार संभालो, जीवन को सुरक्षित कर लो। लेकिन उन्होंने एक अलग निर्णय लिया। उन्होंने सुरक्षित रास्ता नहीं, बल्कि सही रास्ता चुना और तय किया कि वह खुद को उस “बड़ी जिम्मेदारी” के लिए तैयार करेंगे, जहाँ वह केवल अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए काम कर सकें। शिक्षा ने उन्हें केवल एक डिग्री नहीं दी, बल्कि एक दृष्टि दी। एक गरीब परिवार से निकलकर आईएएस बनना, कलेक्टर के रूप में जमीनी हकीकत को समझना और फिर कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर राजनीति को जनसेवा का माध्यम चुनना, यह एक दूरदर्शी व्यक्तित्व के लिए संभव था ।आज छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के रूप में राज्य की आर्थिक दिशा तय करना, यह केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है, जहाँ शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनती है।
वर्ष 2026-27 का छत्तीसगढ़ राज्य का बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओपी चौधरी के जीवन अनुभव और व्यापक दृष्टि का प्रतिबिंब है। इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है। यह केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों से लेकर नया रायपुर की आधुनिक अधोसंरचना और प्रस्तावित मेट्रो परियोजना तक, पूरे राज्य को एक साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करता है। यह बजट बताता है कि विकास का अर्थ केवल शहरों का विस्तार नहीं, बल्कि गांवों का उत्थान भी है। यह बजट केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि एकात्म मानववाद का एक दर्शन है, एक ऐसा दर्शन, जिसमें विकास का केंद्र समाज का हर वर्ग है।
जनजातीय अंचलों से लेकर उभरते हुए शहरी केंद्रों और मेट्रो विज़न तक, यह बजट छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करता है। उदाहरण के लिए, रानी दुर्गावती योजना के तहत बालिकाओं को 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1.5 लाख रुपए की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना केवल एक सहायता राशि नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास, गरिमा और स्वावलंबन में किया गया एक दीर्घकालिक निवेश है। यह पहल बालिकाओं को यह संदेश देती है कि उनका भविष्य सुरक्षित है और राज्य उनकी आकांक्षाओं के साथ खड़ा है। महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकरण में 50% की छूट का प्रस्ताव, महिलाओं को केवल सामाजिक पहचान ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्वामित्व और निर्णय लेने की शक्ति देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। वहीं, ‘लखपति दीदी’ योजना और इसके अंतर्गत प्रस्तावित भ्रमण योजना, महिला स्व-सहायता समूहों को नए अनुभव, नए बाजार और नए अवसरों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करेगी। यह पहल केवल महिलाओं की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक स्थायी और संरचनात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है, जहाँ महिलाएं विकास की सहभागी ही नहीं, बल्कि उसकी अग्रदूत बनकर उभर रही हैं।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर दिया गया विशेष ध्यान इस बजट की संवेदनशीलता को दर्शाता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना, बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की पहल और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना यह स्पष्ट करता है कि यह बजट महिलाओं को केवल सामाजिक सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति प्रदान करने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं और उन्होंने जनजातीय तथा गरीब परिवारों की उन सीमाओं और कठिनाइयों को नजदीक से देखा है, जहाँ संसाधनों की कमी और व्यवस्था की बाधाओं के कारण लोग अपने ही प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने यह समझा है कि विकास केवल आर्थिक अवसरों तक सीमित नहीं होता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शायद यही कारण है कि उन्होंने ‘शक्ति पीठ भ्रमण योजना’ जैसी पहल की नींव रखी है। यह योजना छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने के साथ-साथ समाज के उन वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेगी, जो अब तक इन अनुभवों से वंचित रहे हैं।
प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों, जैसे डोंगरगढ़, रतनपुर और दंतेवाड़ा, से लोगों को जोड़ना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक आत्मविश्वास और सामूहिक पहचान को मजबूत करने का एक माध्यम है। साथ ही, यह पहल सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति देगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर उत्पन्न होंगे। यह केवल एक यात्रा कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक समन्वित प्रयास है जो छत्तीसगढ़ के विकास को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प के साथ, छत्तीसगढ़ आज एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। ‘संकल्प’ केवल बजट की थीम नहीं है, बल्कि यह उस नए छत्तीसगढ़ की परिकल्पना है, जहाँ समावेशी विकास, अधोसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय और नीति से परिणाम तक की स्पष्ट यात्रा दिखाई देती है।
यह बजट उसी माली की तरह है, जो पेड़ की शाखाओं पर नहीं, बल्कि उसकी जड़ों को सींचकर पूरे वृक्ष को हरा-भरा और सुदृढ़ बनाना चाहता है। इस बजट का एक और महत्वपूर्ण केंद्र युवा हैं। शायद इसलिए क्योंकि वित्त मंत्री स्वयं जानते हैं कि शिक्षा किस प्रकार जीवन बदल सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी / युवा करियर काउंसलिंग के लिए 33 करोड़ रुपए का प्रावधान, और एक विशाल आधुनिक परीक्षा केंद्र की स्थापना जैसे कदम देखने में भले छोटे लगें, लेकिन उनका प्रभाव दूरगामी है। ये पहल केवल सुविधाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस अदृश्य बाधा को तोड़ने का प्रयास हैं, जो अक्सर प्रतिभा और अवसर के बीच खड़ी होती है।
ज्ञान और बौद्धिक विकास को केंद्र में रखते हुए नालंदा लाइब्रेरी की स्थापना का निर्णय भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये लाइब्रेरी केवल पुस्तकालय नहीं होंगी, बल्कि युवाओं के लिए ज्ञान, तैयारी और आत्मविकास के आधुनिक केंद्र बनेंगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं को इससे एक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन वातावरण मिलेगा, जो उनके सपनों को साकार करने में सहायक होगा। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार युवाओं और महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य का निर्माता मानते हुए उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और मंच उपलब्ध कराने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है। नए तकनीकी संस्थानों की स्थापना, स्टार्ट-अप मिशन और कौशल विकास जैसी पहल यह सुनिश्चित करती हैं कि छत्तीसगढ़ का युवा केवल अवसरों का इंतजार न करे, बल्कि अवसरों का निर्माण करे।
खुद एक किसान, मुख्यमंत्री ने कृषकों के लिए इस बजट में विश्वास का संदेश दिया है। कृषि उन्नति योजना, सिंचाई परियोजनाएं, सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना यह दर्शाता है कि सरकार किसानों को केवल सहायता नहीं, बल्कि स्थायी समृद्धि प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रही है। एक ऐसा राज्य, जहाँ किसान मजबूत है, वही राज्य वास्तव में मजबूत होता है।
कभी केंद्र में मंत्री रहे विष्णुदेव साय और रायपुर जिले के कलेक्टर ओपी चौधरी राज्य के विकास में औद्योगीकरण के महत्त्व को भलीभांति जानते हैं और इसीलिए उद्योग और निवेश के क्षेत्र में भी यह बजट छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक अधोसंरचना का विस्तार और स्टार्ट-अप मिशन यह संकेत देते हैं कि छत्तीसगढ़ अब केवल संसाधनों का राज्य नहीं, बल्कि अवसरों का राज्य बन रहा है। यह बदलाव रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जनजातीय समाज के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी जो दंतेवाड़ा के कलेक्टर के रूप में अभूतपूर्व विकास योजनाओं के फलीभूत प्रधानमंत्री से पुरस्कृत हुए हैं, का विशेष रूप से बस्तर पर दिया गया ध्यान इस बजट की दूरदर्शिता को दर्शाता है। वर्षों तक नक्सलवाद की छाया में रहा यह क्षेत्र, अपनी अपार प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक समृद्धि और मानव संसाधन के बावजूद विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। लेकिन अब, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा के अथक प्रयासों से नक्सलवाद का प्रभाव कम हो रहा है और शांति एवं स्थिरता की वापसी हो रही है, बस्तर नए अवसरों के द्वार पर खड़ा है। यह क्षेत्र, जो कभी असुरक्षा के कारण संभावनाओं से वंचित था, अब पर्यटन, निवेश और रोजगार का एक नया केंद्र बन सकता है।
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति अब केवल छत्तीसगढ़ की पहचान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बनाने की क्षमता रखती है। सरकार का यह दृष्टिकोण स्पष्ट है कि बस्तर को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि अवसर और समृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बेहतर सड़कें, हवाई कनेक्टिविटी, शिक्षा संस्थान, पर्यटन अधोसंरचना और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले प्रावधान इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वास्तव में, बस्तर का विकास केवल एक क्षेत्र का विकास नहीं होगा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा और जनजातीय समाज को मुख्यधारा में सम्मान और अवसर प्रदान करेगा। यह बजट एक स्पष्ट संदेश देता है कि छत्तीसगढ़ अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को भी अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदलने के लिए तैयार है।
इसके साथ ही, बैगा, पुजारी और गुनिया जैसे पारंपरिक जनजातीय संरक्षकों के लिए 3 करोड़ रुपए का प्रावधान राज्य की उस संवेदनशील सोच को दर्शाता है, जो विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के प्रति भी प्रतिबद्ध है। यह पहल जनजातीय समाज की पहचान, गरिमा और परंपराओं को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सभी पहलों को एक साथ देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि यह बजट केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और बौद्धिक प्रगति तीनों को समान प्राथमिकता देता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. की जीवन यात्रा इस बजट की आत्मा है। जिन्होंने खुद अभावों को देखा, संघर्ष को जिया और शिक्षा के माध्यम से अवसरों की शक्ति को समझा, आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ का कोई भी नागरिक अवसरों के अभाव में पीछे न रह जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “विकसित भारत 2047” का संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व, छत्तीसगढ़ को इस राष्ट्रीय मिशन का एक मजबूत स्तंभ बना रहा है। ओ.पी. चौधरी का यह बजट उसी संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने का माध्यम है।
यह बजट चुनावी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य को जीतने का बजट है। यह अल्पकालिक लोकप्रियता से अधिक दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, अवसरों का विस्तार करना और विकास की एक स्थायी नींव रखना है।
विष्णु देव और ओपी की जुगलबंदी से विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प का यह बजट केवल आर्थिक प्रबंधन का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है, कि जब नेतृत्व में संवेदनशीलता हो, दृष्टि में व्यापकता हो और संकल्प में दृढ़ता हो, तो विकास केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित परिणाम बन जाता है। जनजाति के गांव से मेट्रो विज़न तक, छत्तीसगढ़ की यह यात्रा अब केवल एक संभावना नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बनती जा रही है। और यह ‘संकल्प’ केवल सरकार का नहीं, बल्कि 3 करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है।
