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Republic Day Chief Guest: गणतंत्र दिवस पर पहली बार मुस्लिम देश के राष्ट्रपति होंगे चीफ गेस्ट, कौन हैं जाने...

Republic Day Chief Guest: गणतंत्र दिवस पर पहली बार मुस्लिम देश के राष्ट्रपति होंगे चीफ गेस्ट, कौन हैं जाने...
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Republic Day Chief Guest-NPG डेस्क। इस गणतंत्र दिवस पर पहली बार मुस्लिम देश के राष्ट्रपति चीफ गेस्ट होंगे। राष्ट्रपति का नाम अब्देल फतह अल सीसी हैं और मिस्र के राष्ट्रपति है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी भारत दौरे पर है और दिल्ली पहुंचे है। वे मुख्य अतिथि के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे। अपनी यात्रा के दौरान वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में ही मिस्र के राष्ट्रपति को भारत आने का निमंत्रण भेज दिया था।

सीसी को मिस्र में एक प्रभावशाली नेता माना जाता है। कहा जाता है कि मिस्र की सत्ता पर सीसी की पकड़ लोहे जैसी मजबूत है। राष्ट्रपति बनने से पहले सीसी मिस्र के सेना प्रमुख थे जिन्होंने जुलाई 2013 में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सत्ता से हटा दिया था। इसके एक साल बाद वो खुद मिस्र के राष्ट्रपति बन गए। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका सेना प्रेम कम नहीं हुआ और देश के बाकी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने के बजाए वो सेना को ही मजबूत बनाने में लगे रहे।

अल-सीसी का जन्म अल-गामालिया में 1954 में हुआ था, जो काहिरा के पुराने शहर के यहूदी क्वार्टर के पास स्थित है। अल-सीसी ने एक बार टीवी इंटरव्यू में कहा था कि "मैं एक ऐसे क्षेत्र में पैदा हुआ और पला-बढ़ा हूं, जहां सांस्कृतिक विविधता रही थी और मैं यहूदी क्वार्टर में सिनेगॉग (यहूदियों का पूजा स्थल) देखा करता था।" अल-सिसी ने 1992 में यूके ज्वाइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से सैन्य प्रशिक्षण लिया और 2006 में पेंसिल्वेनिया में यूएस आर्मी वॉर कॉलेज से मास्टर डिग्री प्राप्त की।सऊदी अरब में सैन्य कार्यालय में सुरक्षा प्रमुख के रूप में सेवा देने के बाद अल सीसी 2008 में उत्तरी सैन्य क्षेत्र के कर्मचारियों के प्रमुख के रूप में मिस्र लौट आए। फरवरी 2011 में मिस्र की क्रांति के तुरंत बाद जब सेना ने देश पर नियंत्रण किया तो अल-सिसी को सैन्य खुफिया प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया।

अब्देल फतेह अल-सीसी कॉलेज के दिनों से ही इस्लाम के प्रति ज्यादा लगाव रखते थे। उसी दौरान उन्होंने 'मध्य-पूर्व में लोकतंत्र' नामक एक शोध पत्र लिखा था। उन्होंने अपने शोध पत्र में तर्क दिया था कि मिस्र के लोकतंत्र में धार्मिकता दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक सरकारें धर्मनिरपेक्षता का पालन करती हैं जिससे आबादी का एक बड़ा तबका ठगा हुआ महसूस करता है।

जनरल सीसी एक कट्टर मुसलमान माने जाते थे और इसी कारण सेना ने उन्हें मुस्लिम ब्रदरहुड से संपर्क रखने का जरिया बनाया। मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र में इस्लामिक आंदोलन को बढ़ावा देने वाला संगठन था जिसे अब प्रतिबंधित कर दिया गया है। जून 2012 में मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रमुख शख्सियत मुहम्मद मोर्सी मिस्र के राष्ट्रपति बने।

अगले साल ही राष्ट्रपति मुर्सी को जनता के विरोध और सेना की बगावत के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा। इस बीच अल-सिसी ने राष्ट्रपति को लोगों की मांगों को पूरा करने या समय से पहले चुनाव कराने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी कर दिया। साथ ही उन्होंने सेना के हवाले से यह भी ऐलान किया कि जब तक नयी सरकार नहीं बन जाती तब तक सर्वोच्च संवैधानिक अदालत के मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर सरकार संभालेंगे।

इसके बाद तयशुदा समय से पहले चुनाव कराने की घोषणा कर दी गयी। देश में कई लोगों ने जनरल सीसी से राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करने का आग्रह किया था। दरअसल, मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध रखने वाले वाले राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी को हटाने की कार्रवाई में जनरल सीसी की बेहद अहम भूमिका थी। इसके बाद मई 2014 में मिस्र में राष्ट्रपति के लिए चुनाव हुए। इसमें अल-सीसी ने वामपंथी प्रतिद्वंद्वी हमदीन सब्बाही के खिलाफ जीत हासिल की थी। और वे देश के राष्ट्रपति चुने गए थे।

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