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अब बिहार में बनाया जाएगा कार्यकारी मुख्यमंत्री! परमानेंट CM के पीछे क्या है पेच?

Bihar CM News : बिहार में अचानक से सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच एक नई चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा है बिहार को कार्यकारी सीएम मिलने की।

अब बिहार में बनाया जाएगा कार्यकारी मुख्यमंत्री! परमानेंट CM के पीछे क्या है पेच?
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By Ranjan Kumar

Bihar Next CM News : बिहार में नीतीश युग समाप्त होने वाला है। बिहार के सीएम की कुर्सी पर कोई और बैठेगा और वो बीजेपी से हो सकता है। मगर, क्या नीतीश कुमार जैसे हार्ड बारगेनर के सामने बीजेपी के लिए ये टास्क आसान है? सीधा जवाब नहीं है, इसलिए बिहार में नई चर्चा चल रही।

यह चर्चा है कि बिहार को कार्यकारी मुख्यमंत्री मिल सकता है। इस चर्चा ने तब जोर पकड़ा, जब रविवार को सीएम नीतीश के आवास पर बड़ी बैठक हुई। इसमें जदयू के तमाम बड़े नेता थे। इसके बाद से कयासों का बाजार गर्म हो गया। पटना से दिल्ली तक इस बैठक की चर्चा होती रही। इसी बीच इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि बिहार में कार्यकारी सीएम बनाया जा सकता है।

क्या कहते हैं जानकार ?

पॉलिटिकल एक्सपर्ट और शिक्षाविद् डॉ. संजय कुमार के मुताबिक बिहार में ऐसा हो चुका है। जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता है, तब तक सीएम नीतीश कुमार को भी राज्यपाल कार्यकारी सीएम बने रहने को कह सकते हैं। संभावनाएं हैं कि बीजेपी का पूर्णिकालिक सीएम न होकर कार्यकारी सीएम होगा। ताकि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर असर न पड़े।

कार्यकारी सीएम बनाने की चर्चा की वजह क्या?

इस चर्चा के पीछे 3 वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह या यूं कहें कि रणनीति का हवाला दिया जा रहा। चर्चा है कि नीतीश कुमार सीएम का पद छोड़ देंगे। सूत्रों के अनुसार ऐसे में नीतीश कुमार 3 महीने के लिए बतौर राज्यसभा सदस्य दिल्ली रहेंगे। मगर, वह नए मुख्यमंत्री के काम पर नजर रखेंगे। कार्यकारी सीएम के कामकाज को नीतीश 3 महीने तक देखेंगे। नए कार्यकारी सीएम का काम नीतीश की नीतियों के मुताबिक रहा तो नीतीश उन्हें आगे के लिए हरी झंडी दे देंगे।

चर्चा की वजह नंबर-2

एक रणनीति है कि ऐसे में निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। कार्यकारी सीएम और पिता नीतीश दोनों की छत्रछाया में निशांत कुमार की सत्ता वाली ट्रेनिंग होगी। इस तरह से निशांत को दो अलग-अलग जगहों से दिशा-निर्देश मिलेगी। पहली दिल्ली से पिता नीतीश कुमार के माध्यम से, जो लॉजिक यानी थ्योरी वाली होगी। दूसरी ट्रेनिंग प्रैक्टिकल होगी यानी सत्ता-मशीनरी को करीब से समझना। इसके बाद निशांत को सीएम के चेहरे के लिए भविष्य में आगे करने में जदयू को आसानी होगी।

वजह नंबर-3

तीसरी वजह है कि असम और पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। इसी वजह से बीजेपी बिहार में अभी बड़ा रिस्क लेने के मिजाज में नहीं है। ऐसे में नीतीश कुमार सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर दिल्ली जाएंगे तो इससे विरोधी इन चुनावों में बीजेपी पर गठबंधन धर्म को लेकर तोहमतें लगा सकते हैं। ऐसे में नीतीश के बदले कार्यकारी सीएम देकर बीजेपी एक तीर से कई निशाने लगा सकती है। चुनावों में भी उसके पास ऐसे आरोपों पर जवाब देने के लिए एक अस्त्र मिल जाएगा।

प्रदेश में क्या रहा है कार्यकारी सीएम का इतिहास?

  • बिहार के पहले कार्यकारी सीएम दीप नारायण सिंह थे। वो 17 दिन मुख्यमंत्री रहे थे।
  • फरवरी 1961 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के निधन के बाद वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
  • 1968 में दिवंगत सतीश प्रसाद सिंह भी कार्यकारी मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
  • सतीश प्रसाद सिंह का कार्यकाल सिर्फ 4 दिन रहा था।
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