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राजनीति

Chhattisgarh Rajbhawan: राज्यपाल से तल्खी के बीच बड़ा सवाल...सीएम भूपेश बघेल गणतंत्र दिवस स्वागत समारोह में राजभवन जाएंगे?

आरक्षण संशोधन विधेयक-2022 पर दस्तखत को लेकर रिश्तों की खाई और चौड़ी हो गई। दोनो तरफ से तू डाल-डाल, पात-पात वाली स्थिति है। विधानसभा में आरक्षण विधेयक पारित होते ही देर शाम भूपेश कैबिनेट के सारे मंत्री राजभवन पहुंच गए थे। मंत्रियों ने कहा कि अब विधेयक पास हो गया है, आप दस्तखत कर दीजिए। मगर राजभवन द्वारा कहा गया कि विधिक सलाहकार से पहले राय ली जाएगी। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल काफी नाराज हुए।

Chhattisgarh Rajbhawan: राज्यपाल से तल्खी के बीच बड़ा सवाल...सीएम भूपेश बघेल गणतंत्र दिवस स्वागत समारोह में राजभवन जाएंगे?
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Chhattisgarh Rajbhawan: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उइके की सियासी पृष्ठभूमि कांग्रेस रही है। मध्यप्रदेश के समय दिग्गिवजय सिंह मंत्रिमंडल में वे मंत्री भी रहीं। छिंदवाड़ा की रहने वालीं उइके बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। और अब वे छत्तीसगढ़ की राज्यपाल हैं। सूबे में जब सरकार बदली तो उनके कांग्रेस बैकग्राउंड को देखते समझा गया कि राजभवन और सरकार के बीच कोआर्डिनेशन ठीक रहेगा। मगर ऐसा हुआ नहीं। सरकार के गठन के साथ ही दोनों के बीच खटर-पटर शुरू हो गई।

जाहिर है, सरकार का आरोप रहा कि राज्यपाल विधेयकों को हरी झंडी देने की बजाए रोड़ा अटका रही हैं। विश्वविद्यालय संशोधन विधयेक को लेकर सरकार के कई मंत्री राजभवन पहुंचे और आग्रह किया कि वे दस्तखत कर दें। इस विधेयक में राज्यपाल के पावर कतर दिए गए हैं सो, कानूनी राय लेने का हवाला देते हुए उसे हरी झंडी नहीं मिली। पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति के बाद तकरार और बढ़ गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां तक कह दिया था कि राज्यपाल को जो करना था, कर दिया...अब आगे सरकार देखेगी। हेलिकाप्टर, सरकारी विमान को लेकर कई बार मतभेद हुए। गरियाबंद के किडनी प्रभावित गांव सुपेबेड़ा जाने के लिए राजभवन से हेलिकाप्टर मांगा गया। नहीं उपलब्ध होने पर राज्यपाल सड़क मार्ग से सुपेबेड़ा पहुंच गईं।

आरक्षण संशोधन विधेयक-2022 पर दस्तखत को लेकर रिश्तों की खाई और चौड़ी हो गई। दोनो तरफ से तू डाल-डाल, पात-पात वाली स्थिति है। विधानसभा में आरक्षण विधेयक पारित होते ही देर शाम भूपेश कैबिनेट के सारे मंत्री राजभवन पहुंच गए थे। मंत्रियों ने कहा कि अब विधेयक पास हो गया है, आप दस्तखत कर दीजिए। मगर राजभवन द्वारा कहा गया कि विधिक सलाहकार से पहले राय ली जाएगी। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल काफी नाराज हुए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि विधायकों के द्वारा पारित विधेयक पर राय देने वाला विधिक सलाहकार कौन होता है। उन्होंने कहा, राज्यपाल ने कहा था कि आप बिल पास कीजिए, मैं दस्तखत करने में एक मिनट नहीं लगाउंगी, अब वे बिल पर हस्ताक्षर नहीं कर रही हैं। राज्यपाल ने विधेयक पर साइन करने से पहले दस बिंदुओं पर जवाब मांगा तो पहले सरकार ने कहा, राज्यपाल को विभागों से जवाब मांगने का अधिकार नहीं है। बाद में जवाब दिए गए तो राजभवन से जवाब मीडिया में आउट हो गए। मुख्यमंत्री राजभवन पर कई बार यह आरोप लगा चुके हैं कि राज्यपाल बीजेपी मुख्यालय एकात्म परिसर के इशारे पर काम कर रहीं हैं। अभी हाल में उन्होंने राजभवन को लेकर तल्ख ट्वीट भी किया।

15 अगस्त और 26 जनवरी को राजभवन में राज्यपाल द्वारा स्वागत समारोह किया जाता है। इसमें मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, अधिकारी, मीडिया और राजधानी के गणमान्य लोग शामिल होते हैं। लोगों की उत्सुकता यह जानने की है कि मुख्यमंत्री इस बार राजभवन जाएंगे या नहीं। वैसे, मुख्यमंत्री 26 जनवरी को सुबह जगदलपुर में झंडा फहराएंगे। स्वागत समारोह शाम चार से पांच बजे तक है। ऐसे में, देखना है कि सीएम भूपेश राजभवन जाते हैं या नहीं।

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