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CG उपचुनाव स्टोरी: सीएम बनने के बाद उपचुनाव जीते थे जोगी और रमन, कोटा छोड़ सत्ता पक्ष की कभी हार नहीं हुई, मालखरौदा भी नजीर

CG उपचुनाव स्टोरी: सीएम बनने के बाद उपचुनाव जीते थे जोगी और रमन, कोटा छोड़ सत्ता पक्ष की कभी हार नहीं हुई, मालखरौदा भी नजीर
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By NPG News

मनोज ब्यास@npg.news

रायपुर। छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट उपचुनाव का ऐलान हो गया है। विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मनोज मंडावी के निधन के बाद खाली हुई सीट पर 5 दिसंबर को मतदान होगा। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए यह सीट आरक्षित है। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद यह पांचवां उपचुनाव होगा। इससे पहले दंतेवाड़ा, चित्रकोट, मरवाही और खैरागढ़ में उपचुनाव हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक दर्जनभर से ज्यादा उपचुनाव हो चुके हैं। इनमें सत्ता पक्ष के जीतने का ही ट्रेंड रहा है। हालांकि कोटा इसमें अपवाद है। विधानसभा के स्पीकर रहे पं. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के निधन के बाद इस सीट पर जब 2006 में उपचुनाव हुए थे, तब डॉ. रेणु जोगी जीती थीं। उस समय भाजपा की सरकार थी और कांग्रेस की जीत हुई थी। छत्तीसगढ़ में उपचुनावों के कई रोचक किस्से हैं, आइए जानें...

पहले दोनों सीएम शपथ लेने के बाद लड़े उपचुनाव

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन नवंबर, 2000 में हुआ था। उस समय कांग्रेस ने अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया। जोगी मुख्यमंत्री बने, तब विधानसभा के सदस्य नहीं थे। उन्होंने मरवाही सीट से उपचुनाव लड़ने का फैसला लिया। उस समय मरवाही से भाजपा के विधायक रामदयाल उइके विधायक थे। उन्होंने जोगी के लिए अपनी सीट छोड़ दी और कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इसके बाद उइके कांग्रेस में ही रहे, लेकिन 2018 के चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।

इसी तरह 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, तब पार्टी ने डॉ. रमन सिंह को सीएम घोषित किया। उस समय रमन सिंह सांसद थे। उनके लिए प्रदीप गांधी ने डोंगरगांव की सीट छोड़ी थी। 2004 में जब लोकसभा चुनाव हुए, तब गांधी को मौका दिया गया। वे जीते भी, लेकिन बाद में लोकसभा में पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में फंसे और उन्हें निष्कासित कर दिया गया। हालांकि बाद में डोंगरगांव की सीट आरक्षित हो गई और डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव सीट को चुना।

चुनाव में हारे, फिर लड़कर जीते थे निर्मल सिन्हा

भाजपा नेता निर्मल सिन्हा इकलौते ऐसे नेता हैं, जो पहले चुनाव हारे, फिर चुनाव याचिका लगाई। इसमें तत्कालीन विधायक लालसाय खूंटे की सदस्यता खत्म हुई। इसके बाद उपचुनाव हुए और निर्मल सिन्हा की जीत हुई। उस समय सिन्हा मालखरौदा सीट से जीते थे। वर्तमान में यह सीट नहीं है।

खैरागढ़ में पहले भी उपचुनाव

खैरागढ़ ऐसी विधानसभा सीट है, जहां राज्य बनने के बाद दो बार उपचुनाव हुए हैं। 2003 में इस सीट से देवव्रत सिंह चुनाव जीते थे। बाद में जब प्रदीप गांधी की सदस्यता चली गई, तब राजनांदगांव लोकसभा के लिए उपचुनाव हुए। इसमें कांग्रेस ने देवव्रत सिंह को प्रत्याशी बनाया। देवव्रत सिंह इस चुनाव में जीते, लेकिन खैरागढ़ सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा से कोमल जंघेल जीते थे। देवव्रत सिंह के निधन के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस से यशोदा वर्मा जीती हैं।

उपचुनाव का ऐसा भी कनेक्शन

बालोद और केशकाल सीट पर हुए उपचुनाव का एक संयोग भाजपा की कार्यसमिति से जुड़ा है। बालोद के तत्कालीन विधायक मदन साहू भाजपा की कार्यसमिति में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। इस सीट पर उनकी पत्नी कुमारी साहू जीती थीं। इससे पहले केशकाल के विधायक महेश बघेल का निधन कार्यसमिति से लौटने के दौरान एक हादसे में हुआ था। भटगांव के विधायक रविशंकर त्रिपाठी का निधन सड़क हादसे में हुआ था।

छत्तीसगढ़ में अब तक हुए विधानसभा के उपचुनाव

मरवाहीः 2001 (सत्ता पक्ष)

अजीत जोगी (कांग्रेस) 71,211

अमरसिंह खुसरो (भाजपा) 20,453

डोंगरगांवः 2004 (सत्ता पक्ष)

डॉ. रमन सिंह (भाजपा) 42,115

गीतादेवी सिंह (कांग्रेस) 32,004

अकलतराः 2004 (सत्ता पक्ष)

छतराम देवांगन (भाजपा) 39,859

डॉ राकेश कुमार सिंह (कांग्रेस) 29,187

कोटाः 2006 (विपक्ष)

रेणु जोगी (कांग्रेस) 59,465

ठाकुर भूपेंद्र सिंह (भाजपा) 35,995

मालखरौदाः 2007 (सत्ता पक्ष)

निर्मल सिन्हा (भाजपा) 45,576

मोहन मणि (कांग्रेस) 23,589

खैरागढ़ : 2007 (सत्ता पक्ष)

कोमल जंघेल (भाजपा) 57,949

पद्मा देवव्रत सिंह (कांग्रेस) 41,962

केशकालः 2008 (सत्ता पक्ष)

सेवक राम नेताम (भाजपा) 58,362

बुधसेन मरकाम (कांग्रेस) 36,476

वैशालीनगरः 2009 (विपक्ष)

भजन सिंह निरंकारी (कांग्रेस) 47,225

जागेश्वर साहू (भाजपा) 45,997

भटगांवः 2010 (सत्ता पक्ष)

रजनी त्रिपाठी (भाजपा) 74,098

उमेश्वर शरण सिंहदेव ( कांग्रेस) 39,236

बालोद : 2011 (सत्ता पक्ष)

कुमारी मदन साहू (भाजपा) 64,185

मोहन पटेल (भाजपा) 54,520

अंतागढ़ः 2014 (सत्ता पक्ष)

भोज राज नाग (भाजपा) 51,530

रूपधर पुडो (सीपीआइ) 12,086

चित्रकोटः 2019 (सत्ता पक्ष)

राजमन बेंजाम (कांग्रेस) 62,097

लच्छुराम कश्यप (भाजपा) 44,235

दंतेवाड़ाः2019 (सत्ता पक्ष)

देवती कर्मा (कांग्रेस) 50,028

ओजस्वी मंडावी (भाजपा) 38,836

खैरागढ़

यशोदा वर्मा (कांग्रेस) 87879

कोमल जंघेल (भाजपा) 67703

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