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आरक्षण विधेयक के 40 दिन पूरे: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की, BJP अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष को घेरा

आरक्षण विधेयक के 40 दिन पूरे: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की, BJP अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष को घेरा
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By NPG News

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 76 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पारित विधेयक को राजभवन में अटके 10 जनवरी को 40 दिन पूरे हो गए। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अभी तक विधेयक पर दस्तखत नहीं किया है। इसे लेकर पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार का हस्तक्षेप कर राज्यपाल से दस्तखत करने के लिए कहना चाहिए। साथ ही, मरकाम ने भाजपा अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल को भी घेरा है। उन्होंने कहा कि दोनों ही ओबीसी समाज के हैं, लेकिन उन्हें अपने समाज की फिक्र नहीं है।

पीसीसी अध्यक्ष मरकाम ने कि भाजपा के आदिवासी नेता आरक्षण विधेयक पर अपना रुख साफ करें। आरक्षण संशोधन विधेयक में आदिवासी समाज के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। बिलासपुर हाईकोर्ट से 58 प्रतिशत आरक्षण को 50 प्रतिशत किए जाने पर आदिवासी समाज का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। आरक्षण विधेयक राजभवन में रुका है तो इसका खामियाजा आदिवासी समाज को सबसे ज्यादा हो रहा है। कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार से मांग करती है कि वह हस्तक्षेप कर आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल को हस्ताक्षर करने के लिए कहे।

मरकाम ने कहा कि आरक्षण संशोधन विधेयक में ओबीसी के लिए भी 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष साव, नेता प्रतिपक्ष चंदेल ओबीसी वर्ग से आते हैं, लेकिन ओबीसी वर्ग के हितों के खिलाफ जाकर वे लोग भी आरक्षण विधेयक को राजभवन में रोकवाए हैं।

ठोस आधार का अध्ययन किया

पीसीसी अध्यक्ष ने कहा, कांग्रेस सरकार ने वर्तमान विधेयक को बनाने के ठोस आधार का अध्ययन किया है। कांग्रेस ने सर्व समाज को आरक्षण देने के लिए अपना काम पूरी ईमानदारी से कर सभी वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया है। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति को उनकी जनगणना के आधार पर तथा पिछड़ा वर्ग को क्वांटीफाएबल डाटा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का प्रावधान किया। इस विधेयक में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को भी 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

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