CG Housing Scam: करप्शन के खेल में उड़ा गरीबों के आशियाना का सपना: मंत्री शिव डहरिया और सचिव अय्याज तंबोली के एक फैसले से 70 हजार में आवास पर लगा ग्रहण
CG Housing Scam: छत्तीसगढ़ में कालोनाईजरों को मालामाल करने नियमों में हुए खेल से न केवल गरीब प्रभावित हुए हैं बल्कि प्रशासन के लिए झुग्ग्यिं का विस्थापन बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासन के लिए विस्थापना का विकल्प ही खत्म हो गया है। केद्रांश और राज्यांश के बाद गरीबों को पांच लाख का मकान 70 हजार में मिल जाता था, अब वो पुरानी बात हो जाएगी। बता दें, पिछली सरकार में विधानसभा चुनाव 2023 के ऐलान होने से महीने भर पहले नगरीय निकाय मंत्री शिव डहरिया और नगरीय प्रशासन मंत्री अय्याज तंबोली ने गरीबों के हित के लिए बनाया गया नियम बदल दिया।

CG Housing Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ में कालोनाईजरों को उपकृत करने बदले गए नियम से गरीबों के हकों पर डाका तो पड़ा ही, सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो गई है कि वह अब गरीबों और झुग्गी-झोपड़ी वालों को कहां विस्थापित करेगा।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कालोनाईजर नगरनिगमों और नगरपालिकाओं को 15 परसेंट जमीन देते थे, उसमें केंद्र और राज्य के अंश से गरीबों के लिए आवास बनाए जाते थे। जमीन छोड़कर सिर्फ इन घरों को बनाने में करीब पांच लाख रुपए का खर्च बैठता था। पांच लाख के इस मकान को गरीबों को 70 हजार में अलॉट किया जाता था। मगर अब कालोनाईजर जमीन ही नहीं देंगे तो नगरनिगम और नगरपालिका मकान कैसे बनाएंगे। याने गरीबों के 70 हजार पर आशियाना अब सपना बनकर ही रह जाएगा।
यहां यह बताना जरूरी है कि कालोनाईजरों से जो 15 परसेंट जमीनें मिलती थी, उससे नगर निगमों और नगरपालिकाओं के पास एक बड़ा लैंड बैंक बन जाता था। वो भी शहरों के बीच में। कालोनाईजर नियम के अनुसार कालोनी के तीन किलोमीटर के दायरे में 15 परसेंट जमीन गरीबों के लिए रिजर्व किया जाता था। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत इसमें कमजोर वगों के लिए मकान बनाए जाते थे।
जाहिर है, छत्तीसगढ़ में 2023 में विधानसभा चुनाव से महीनेभर पहले कालोईजर नियमों में बड़ा बदलाव किया गया। एक्ट के शब्दों में थोड़ा हेरफेर किया गया, लेकिन इससे ही बड़ा खेल हो गया।
ज्ञातव्य है, नियमों में चेंज बिना विभागीय मंत्री और विभागीय सचिव के अनुमोदन के संभव नहीं होता। सितंबर 2023 में जब इस घोटाले को अंजाम दिया गया, उस समय शिव डहरिया नगरीय प्रशासन मंत्री थे और 2009 बैच के आईएएस अफसर अय्याज तंबोली नगरीय प्रशासन सचिव थे। इन लोगों के खेल में न केवल गरीबों को बड़ा नुकसान हुआ बल्कि प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारों के अनुसार कालोईजर नियम में किए गए बदलाव के बाद गरीबों और निम्न आय वर्ग के लिए जमीन आरक्षित या उसके बदले जमीन देने का नियम ही बदल दिया गया। पहले नियम था कि कालोनाईजर जहां प्लांटिंग कर रहा है उसी क्षेत्र के आसपास अपनी योजना क्षेत्र का 15 प्रतिशत जमीन नगर निगम को देता था। इन्हीं जमीनों पर केंद्र सरकार की हाउसिंग फॉर ऑल योजन के तहत गरीबों के लिए मकान बनाए जाते थे। इन मकानों को गरीबों को आवंटित किया जाता था। शहर की झुग्गी बस्तियों के विस्थापन में इन्हीं मकानों का उपयोग किया जाता था। हाउसिंग फॉर ऑल योजना में केंद्र और राज्य सरकार दोनों राशि देते थे। ऐसे में गरीबों को इन मक्के मकानों के लिए केवल 70 हजार रुपये देना पड़ा था।
बताया जा रहा है कि 2023 में नियमों में बदलाव के बाद नगर निगम को जमीन उपलब्ध कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। कालोईजरों पर छोड़ दिय गया कि वे ही मकान बनाए और उसे गरीबों को आवंटित कर दें। अफसरों के अनुसार नियम में किए गए इस बदलाव के बाद से प्रदेश के किसी भी शहर में गरीबों के लिए आवास नहीं बन पा रहा है। ऐसे में सभी शहरों में विस्थापना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
पीएम आवास योजना के कारण नहीं गया किसी का ध्यान
छत्तीसगढ़ में कालोनाईजर एक्स में संशोधन से पहले ही केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत कर दी थी। इस योजना के तहत भी गरीबों को मकान दिया जाने लगा। इसी वजह से कालोनाईजरों से मिलने वाली जमीन और उस पर बनने वाले मकानों की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया।