CG Congress News: ओबीसी की सियासत में बीजेपी का पलड़ा भारी, क्या ओबीसी को मिलेगा छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष का पद!
CG Congress News: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में नई टीम आने और जिलों में नए पदाधिकारियों के बाद अब छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को ऊर्जा देने की तैयारी की जा रही है। राजनीतिक समीकरण के हिसाब से ओबीसी का पलड़ा भारी दिख रहा है।

CG Congress News: रायपुर। छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम के राज्यसभा जाने के बाद दो साल से महिला कांग्रेस शून्य पर दिख रही हैं इन दो सालों में कभी कांग्रेस ने नई अध्यक्ष बनाने की कोशिश नहीं की, जबकि इस अवधि में विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी हो गए। हार के कारणों में इसे भी एक वजह माना जा रहा है। प्रदेश स्तर पर महिला कांग्रेस सक्रिय नहीं होने का सीधा असर जिलों में पड़ा है और रायपुर, बिलासपुर सहित तमाम जिलों में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष लगभग गायब हैं। किसी किसी जिले में तो पता भी नहीं चलता कि यहां की महिला कांग्रेस की कमान किसके पास है।
आलाकमान ने अब जाकर महिला कांग्रेस की सुध ली है और नई प्रदेश अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि चार जनवरी को दिल्ली में महिला कांग्रेस अध्यक्ष के दावेदारों का इंटरव्यू हो सकता है। इस इंटरव्यू के जरिए सशक्त महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की कोशिश की जाएगी। बताया यह भी जा रहा है कि दावेदारों को दिल्ली बुला लिया गया है। इनमें प्रमुख नाम बालोद विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक छन्नी साहू, लक्ष्मी ध्रुव, ममता चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य तूलिका कर्मा सामने आए हैं। संभावना है कि इन्हीं पांच नामों में से किसी को फाइनल किया जा सकता है। केवल एक प्रतिशत ही कोइ छठवां नाम आने की संभावना है। पार्टी नेताओं का मानना है कि अभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान दीपक बैज के पास है, जो आदिवासी हैं। इस लिहाज से महिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद से आदिवासी महिला दावेदार के नंबर कम हो रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ में राजनीतिक और सामाजिक समीकरण के हिसाब से ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग को मौका मिलने की संभावना अधिक है। इनमें भी छन्नी साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। छन्नी की राजनीतिक पकड़ अच्छी है और सक्रियता के हिसाब से भी इन्हें अवसर दिया जा सकता है। यदि इन दोनों वर्ग को जगह नहीं दी गई, तब सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सकता है, मगर अभी इस वर्ग से कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया है। हाल ही में कांग्रेस से निष्कासित और फिर बहाल की गई कुछ महिला नेताओं के नामों की चर्चा जरुर है, पर दम नहीं दिख रहा है।
ओबीसी कांग्रेस की मजबूरी
ओबीसी महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाना अब कांग्रेस की मजबूरी भी दिख रही है। जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों में भी ओबीसी का ख्याल रखा गया है। दरअसल, बीते चुनावों में भाजपा ने ओबीसी पत्ता फेंका था और भाषणों में बराबर महत्व दिया गया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी वर्ग से हैं, इस कारण यह मुद्दा बनता चला गया और भाजपा ने यह हवा फैला दी कि कांग्रेस ओबीसी की उपेक्षा कर रही है। इसके आधार पर भाजपा को कितने वोट मिले यह तो पता नहीं, लेकिन मुद्दा दमदार जरुर बन गया था। इस कारण से कांग्रेस अब महिला कांग्रेस की कमान ओबीसी को देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
