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आध्यात्मिक गुरु के रूप में निभाई परंपरा: कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बाराडेरा मेले में फहराया 'पालो'

Baradera Mele Me Fahraya Palo: आरंग/रायपुर: राजधानी रायपुर के समीप ग्राम बाराडेरा (तुलसी) में आयोजित ऐतिहासिक 'गुरु दर्शन मेला' के दूसरे दिन आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। सतनामी समाज के पूज्य गुरु एवं छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपनी आध्यात्मिक गरिमा और गुरु परंपरा का निर्वहन करते हुए इस भव्य आयोजन में शिरकत की। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु धर्म के दायित्वों को निभाते हुए, गुरु साहेब ने स्वयं सीढ़ी के सहारे 45 फीट ऊंचे जैतखाम पर चढ़कर विधि-विधान के साथ 'पालो' (श्वेत ध्वज) चढ़ाया।

आध्यात्मिक गुरु के रूप में निभाई परंपरा: कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बाराडेरा मेले में फहराया पालो
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By Chitrsen Sahu

Baradera Mele Me Fahraya Palo: आरंग/रायपुर: राजधानी रायपुर के समीप ग्राम बाराडेरा (तुलसी) में आयोजित ऐतिहासिक 'गुरु दर्शन मेला' के दूसरे दिन आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। सतनामी समाज के पूज्य गुरु एवं छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपनी आध्यात्मिक गरिमा और गुरु परंपरा का निर्वहन करते हुए इस भव्य आयोजन में शिरकत की। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु धर्म के दायित्वों को निभाते हुए, गुरु साहेब ने स्वयं सीढ़ी के सहारे 45 फीट ऊंचे जैतखाम पर चढ़कर विधि-विधान के साथ 'पालो' (श्वेत ध्वज) चढ़ाया। इस गौरवशाली पल के साक्षी धरसींवा विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा एवं हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु बने।



समाज के नाम पूज्य गुरु खुशवंत साहेब ने संदेश देते हुए कहा कि परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी का मार्ग सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता का मार्ग है। 'मनखे-मनखे एक समान' के संदेश को आत्मसात करना ही सच्ची गुरु सेवा है। जैतखाम पर फहराता यह श्वेत ध्वज हमारी शांति और पवित्रता का प्रतीक है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और संगठन के माध्यम से उन्नति के पथ पर अग्रसर होना चाहिए।




पूज्य साहेब ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर समाज और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि गुरु अमरदास जी की यह तपोभूमि हमें त्याग और सेवा की प्रेरणा देती है। बाराडेरा धाम देश का एकमात्र ऐसा पावन धाम है जहाँ बाबा गुरु घासीदास जी के द्वितीय पुत्र गुरु अमरदास जी और माता पातापुरहीन का गुरुद्वारा स्थापित है। यहाँ वर्ष 1929 से निरंतर मेले का आयोजन हो रहा है।




मेले में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने दंडवत होकर गुरु गद्दी का आशीर्वाद लिया। विधायक अनुज शर्मा एवं मेला समिति के पदाधिकारियों ने गुरु साहेब जी का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मेले में पंथी नृत्य और मंगल भजनों के माध्यम से सतनाम संस्कृति की भव्य छटा बिखरी रही, जिसने ग्रामीण परिवेश को भक्तिमय कर दिया।

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