ट्रेनी IAS अफसरों से PM मोदी बोले- दिखास और छपास से दूर रहें….काम की बदौलत छपना-दिखना चलेगा…लेकिन छपने-दिखने के लिए ही काम करना, ये ठीक नहीं… इन बातों की भी दी सलाह ..

सिविल सर्विसेज के ट्रेनी अफसरों को पीएम मोदी की सलाह- ‘दिखास’ और ‘छपास’ से दूर रहें

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“अपने दिमाग में बाबू मत आने दीजिए, आप कहां से आए हैं इसका ख्याल रखिए। अफसरों को Rule और Role का ख्याल रखना चाहिए। आपको ध्यान यह भी रखना है छपास और दिखास का रोग न लगे, मतलब अखबार में छपना और टीवी में दिखना…. नहीं तो आप लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे, ये सलाह मैं अपने विधायक और सांसदों को भी देता हूं। काम की वजह से दिखना-छपना तो ठीक है…लेकिन दिखने और छपने के लिए ही काम करना सही नहीं है “

नयी दिल्ली 31 अक्टूबर 2020। प्रधानमंत्री अपने दो दिवसीय दौरे पर इन दिनों गुजरात में हैं। उन्होंने आज सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती पर स्टैच्यू आप यूनिटी पर पहुंचकर सरदार बल्लभ भाई पटेल को नमन किया। इस दौरान उन्होंने  ट्रेनी IAS अफसरों को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने करीब 33 मिनट के अपने संबोधन में आईएएस अफसरों का हौसला भी बढ़ाया और उन्हें काबिलियत का भी अहसास कराया।

पीएम मोदी इस दौरान अफसरों को कहा कि अगर आपको आगे बढ़ना है तो दिखास’ और ‘छपास’ ये दो रोगों से दूर रहिएगा. दिखास और छपास यानी, टीवी पर दिखना और अखबार पर छपना. ये दोनों रोग जिसे लगे, वो अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर सकता. उन्होंने आगे कहा,”जो भी काम करिए, जिस किसी के लिए भी करिए, अपना समझ कर करिए. जब आप अपने विभाग में सामान्य जनों को अपना परिवार समझ कर काम करेंगे, तो आपको कभी थकान नहीं होगी, आप हमेशा नई ऊर्जा से भरे रहेंगे.

उन्होंने कहा कि सरकार शीर्ष से नहीं चलती है. नीतियां जिस जनता के लिए हैं, उनका समावेश बहुत जरूरी है. जनता केवल सरकार की नीतियों की, प्रोग्राम्स की रिसीवर नहीं है, जनता जनार्दन ही असली ड्राइविंग फोर्स है. इसलिए हमें गवर्नमेंट से गवर्नेंस की तरफ बढ़ने की जरूरत है.पीएम ने कहा, “आपसे मेरा आग्रह है कि आज की रात सोने से पहले खुद को आधा घंटा दीजिए. अपने कर्तव्य, दायित्व, प्रण के बारे में जो आप सोच रहे हैं, उन्हें लिखकर रख लीजिएगा. ये कागज का टुकड़ा जीवन भर आपके संकल्पों को साकार करने के लिए आपके हृदय की धड़कन बनकर आपके साथ रहेगा.

पीएम ने कहा कि अफसरों को सरदार साहब की सलाह थी कि देश के नागरिकों की सेवा अब आपका सर्वोच्च कर्तव्य है. मेरा भी यही आग्रह है कि सिविल सर्वेंट जो भी निर्णय ले, वो राष्ट्रीय संदर्भ में हों, देश की एकता अखंडता को मजबूत करने वाले हों.

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