BHU में नियुक्ति से चर्चा में आए डॉ. फिरोज के पिता मुन्ना मास्टर को पद्मश्री….आखिर कौन हैं मुन्ना मास्टर और फिरोज खान का बीएचयू में नियुक्ति को लेकर क्यों बवाल हुआ था….पढ़िये

नयी दिल्ली 26 जनवरी 2020। आज पूरा देश 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना भाषण भी दिया. गणतंत्र दिवस को लेकर शनिवार को पद्म पुरस्कारों का भी एलान किया गया. बता दें कि इस बार राजस्थान के जयपुर शहर में रहने वाले भजन गायक रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को पद्मश्री से नवाजा गया है. मुन्ना मास्टर भगवान श्रीकृष्ण और गाय पर भक्ति गीतों के लिए जानें जाते हैं.

मुन्ना मास्टर प्रोफेसर फिरोज खान के पिता हैं. बता दें कि ये वही फिरोज खान हैं जिनका बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्कृत निकाय में नियुक्ति को लेकर बवाल हुआ था. फिरोज खान की 5 नवंबर को बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर इंटरव्यू के बाद उनकी नियुक्ति की गई थी. जिसके बाद बीएचयू के छात्रों ने इस बात का विरोध किया और 7 नवंबर से छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे. इसके बाद फिरोज खान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उन्होंने संस्कृत विभाग के कला संकाय में नियुक्ती मिली.

फिरोज ने बताया कि उनके परिवार को संगीत और संस्कृत का संस्कार दादा संगीत विशारद गफूर खान से मिला। उन्होंने ही पिता और फिर पिता ने हम बच्चों को इस ओर प्रेरित किया। फिरोज ने कहा कि पिता को यह सम्मान मिलने से वे खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

मुन्ना मास्टर ने इसे अकल्पनीय बताते हुए कहा कि सपने में भी ऐसे सम्मान के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने कहा कि गो माता की सेवा और कृपा से ही ऐसा संभव हुआ है। मुन्ना मास्टर ने कहा कि इस सम्मान का श्रेय वे अपने पिता गफूर खान को देते हैं, जिन्होंने उन्हें इस राह पर चलाया। उन्होंने इसे सभी देशवासियों का सम्मान बताया।

मुन्ना मास्टर के चारों बेटों वकील, शकील, फिरोज और वारिस ने संस्कृत पढ़ी है। उनकी बड़ी बेटी का नाम अनीता है। उन्होंने दीपावली के दिन जन्मी छोटी बेटी का नाम लक्ष्मी रखा है। घर की दीवारों पर कृष्ण की तस्वीरें लगी हैं। मुन्ना मास्टर गोशाला के मंदिर में संकीर्तन करते हैं। उन्होंने श्याम सुरभि वंदना नामक भजन पुस्तिका भी लिखी है।

डॉ. फिरोज के बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। बाद में उनका कला संकाय के संस्कृत विभाग में चयन हो गया।

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