शाहीन बाग़ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप इस तरह विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क नहीं कर सकते ब्लॉक, हर कोई ऐसे प्रदर्शन करने लगे तो…

नई दिल्ली 10 फरवरी 2020। नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में दक्षिण दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई।  जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने टिप्पणी की कि 15 दिसंबर से इस सड़क पर प्रदर्शन किया जा रहा है। विरोध करना ठीक है, लेकिन सार्वजनिक सड़क पर प्रदर्शन ठीक नहीं है। वहीं, चार महीने के बच्चे के मामले में याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार नोटिस जारी किया है।

बच्चे की मौत पर लिया था स्वत: संज्ञान

इसके अलावा शाहीन बाग में प्रदर्शन के दौरान मासूम की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।  प्रदर्शन में मासूम और नाबालिगों की भागीदारी रोकने को लेकर भी आज सुनवाई हुई।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सड़क से प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद सुनवाई करने का फैसला लिया था।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हो रहे प्रदर्शन की वजह से सड़क बंद होने की समस्या को समझता है।  इसके बाद शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया था।  जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की खंडपीठ ने कहा, ‘हम समझते हैं कि समस्या है।  अब हमारे सामने सवाल यह है कि हम इसको कैसे हल करते हैं?’

पिछली सुनवाई में जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने कहा था, ‘हम इस बात को समझते हैं कि वहां समस्या है और हमें देखना होगा कि इसे कैसे सुलझाया जाए। पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह सोमवार को इस बात पर बहस करने के लिए तैयार होकर आएं कि इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट को वापस क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए।

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