यूनाईटेड अंगेस्ट हेट के सह संस्थापक उमर ख़ालिद गिरफ्तार.. 11 घंटे की पूछताछ के बाद दिल्ली दंगों के साज़िशकर्ता के रुप में गिरफ़्तार..

नई दिल्ली,14 सितंबर 2020। दिल्ली दंगों को लेकर बीते 6 मार्च को दर्ज FIR जिसका क्राईम नंबर 59 हैं, उसमें बतौर अभियुक्त पहले स्थान पर दर्ज उमर ख़ालिद को दिल्ली पुलिस ने क़रीब 11 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ़्तार कर लिया है।दंगों को लेकर दर्ज FIR में यूएपीए की धाराओं का हवाला है, उमर ख़ालिद को अन लॉ फूल प्रिवेंशन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ़्तार किया गया है।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि उमर ख़ालिद ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ़रवरी में संपन्न हुई भारत यात्रा के दौरान भारत की ग़लत छवि पेश करने की नियत से दंगों की साज़िश की।
हालांकि इसके लिए उमर ख़ालिद के जिस भाषण को लेकर यह मामला क़ायम किया गया है, उसे लेकर गंभीर तथ्यात्मक सवाल खड़े किए गए हैं। हालाँकि कथित दक्षिण पंथी समर्थक उमर ख़ालिद का जिक्र “टूकडे टूकड़े गैंग” यहाँ तक कि “देशद्रोही” के रुप में करते हैं, जिसे लेकर उमर ख़ालिद का कई बार यह बयान आया है कि मीडिया के एक वर्ग ने ऐसी छवि गढ़ी है जिसकी वजह से वे लगातार कुछ लोगों की नफ़रत का शिकार होते रहे हैं।

बहरहाल जो बयान उमर ख़ालिद के लिए मुसीबत का सबब बना है वह बयान सत्रह फ़रवरी को अमरावती में दिया गया था।इस बयान में कथित तौर पर उमर ख़ालिद ने कहा –
“डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद हम दुनिया को बताएँगे कि हिंदुस्तान की सरकार जनता के साथ क्या कर रही है.. मैं आप सबसे अपील करता हूँ कि देश के हुक्मरानों के ख़िलाफ़ बाहर निकलिए”
दिल्ली दंगों की गूंज जबकि देश की संसद में गूंजी तब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाषण के इस अंश को पढते हुए सदन को कहा –“17 फ़रवरी को इस भाषण के बाद 23-24 फ़रवरी को दिल्ली में दंगा हो गया”
अपने बयानों ट्वीट और आयोजनों से अक्सरकर विवादों में आने वाले उमर ख़ालिद 2016 में आतंकी और आतंकी संगठनों के पोस्टर बॉय बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद फ़ेसबुक पर एक पोस्ट की वजह से भी विवादों में आए थे, हालाँकि तब वो पोस्ट डिलीट कर दी गई थी। उमर ख़ालिद इसके पहले भारत की सर्वोत्तम शिक्षा संस्थान में जो कि प्रथम पाँच में आती है के कैंपस में अफ़ज़ल गुरु की फाँसी सजा को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया था जिस पर उमर और उसके साथियों के ख़िलाफ़ गंभीर धाराओं में कार्यवाही की गई थी। बहरहाल जिस बयान को दंगों का आधार बनाया गया है उसे लेकर कहा गया है कि बयान को अधुरा प्रस्तुत किया गया। मूलतः बयान में जो बोला गया वो कुछ यूँ था –

“जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत में होंगे तो हमें सड़कों पर उतरना चाहिए. 24 तारीख़ को ट्रंप आएँगे तो हम बताएँगे कि हिंदुस्तान की सरकार देश को बाँटने की कोशिश कर रही है. महात्मा गांधी के उसूलों की धज्जियाँ उड़ा रही है. हम दुनिया को बताएँगे कि हिंदुस्तान की आवाम हिंदुस्तान के हुक्मरानों के ख़िलाफ़ लड़ रही है. उस दिन हम तमाम लोग सड़कों पर उतर कर आएँगे.”

लेकिन जाँच ऐजेंसी ने इस बयान में भी यह बात पाई कि, विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के सामने भारत और भारत की निर्वाचित सरकार के प्रति विद्वेष का भाव पैदा करने की नियत है।
उमर ख़ालिद अब जेल में है, और जो यूएपीए की धाराएँ लगाई गई हैं, रिहाई को लेकर वक्त लंबा और मुश्किलों भरा हो सकता है।

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