एनपीजी सुपोषण मुहिम स्टोरीः सीएम भूपेश बघेल की पहल पर बस्तर में कुपोषण और एनिमिया दूर करने मूंगफल्ली, गुड़ और काजू से तैयार किया जा रहा लड्डू, महिलाएं आत्मनिर्भर भी हो रहीं

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रायपुर, 27 अगस्त 2020। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर शुरू की गई बिहान योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए वरदान बन गई है। इस योजना का लाभ उठाकर बस्तर की महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हो रहीं बल्कि सुपोषण के क्षेत्र में भी अहम कार्य कर रही हैं।
एक पंथ और दो काज वाली कहावत वनांचल और आदिवासी क्षेत्र बस्तर में चरितार्थ हो रही है, जहां सुपोषण और महिला स्वालंबन के लक्ष्य को एक साथ साधा जा रहा है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल की पहल पर बस्तर में कुपोषण और एनीमिया की चुनौती से सभी स्तरों पर बड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है। इसकेे लिए सभी विभागों द्वारा समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। कुपोषण मुक्ति अभियान से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी बिहान समूह की महिलाओं को जोड़ा गया है। इन महिलाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षित कर कुपोषण दूर करने के लिए मूंगफली,गुड़ और काजू से लड्डू तैयार करने का काम दिया गया है। ये महिला समूह न सिर्फ लड्डू तैयार कर रही हैं बल्कि उसकी पैकिंग के लिए डब्बे भी खुद बनाती हैं। इससे महिलाओं के स्वालंबन की नई राह भी तैयार हो गई है। लड्डू बनाकर महिला समूहों ने अब तक 31.50 लाख रूपये आय प्राप्त कर ली है। बस्तर में जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंर्तगत 06 माह से 06 आयु वर्ष के बच्चे ‘‘हरिक नानी बेरा‘‘ (खुशहाल बचपन) व 15 आयु वर्ष से 49 आयु वर्ष के गंभीर एनीमिक महिलाओं के लिए आमचो लेकी, आमचो माय (हमारी लड़की हमारी माता) आरंभ किया गया है। इसके लिए नोडल एजेन्सी पंचायत एवं ग्रामीण विकास है। बिहान समूह की महिलाओं द्वारा तैयार मूंगफली,गुड़ और काजू से पौष्टिक लड्डू को ‘‘हरिक नानीबेरा (खुशहाल बचपन)‘‘ अभियान अंतर्गत जिले के 1081 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 41 हजार 474 बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण आहार के रूप में प्रदान किया जा रहा है। योजना को अब 1981 आंगनवाडी केंद्र के 72 हजार लाभार्थियों तक विस्तारित कर दिया गया है। इसके तहत बच्चों को सोमवार, बुधवार, शुक्रवार 3 दिन मूंगफल्ली गुड़ का 25 ग्राम का 01 लड्डू लडडू और मंगलवार, गुरूवार तथा शनिवार  को 3 दिवस एक उबला अण्डा प्रदान किया जाएगा।

समूहों द्वारा लड्डू तैयार करने से लेकर वितरण तक जिला प्रशासन द्वारा पूरी कार्ययोजना तैयार की गई है,जिससे कुपोषण को दूर करने के साथ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर किया जा सके। कलस्टर आधार पर महिला समूहों का चयन किया गया है। चयन के पश्चात् लड्डू बनाने के लिए जिला स्तर पर महिला बाल विकास विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रथम चरण में 81 आंगनबाड़ी केंद्रो के लिए 5 महिलए समूह, द्वितीय चरण हेतु 1081 केंद्रो के लिए 11 समूह और तृतीय चरण हेतु 1981 केंद्रो के लिए 24 स्व-सहायता समूहों का चयन लडडू बनाने के लिए किया गया है। प्रति किलो 650  ग्राम मुंगफल्ली, 350 ग्राम गुड़ और काजू, इलायची स्वादानुसार मिलाकर समूह के माध्यम से लडडू तैयार किया जाता है। इसके बाद विकासखण्ड के महिला बाल विकास विभाग, सेक्टर, आँगनबाड़ी केंद्र तक सप्लाई की जाती है।
महिला समूह के 10 सदस्यों के माध्यम से प्रतिदिन 2000 से 2500 लड्डू निर्माण किया जाता है। समूहों द्वारा अब तक 65.37 लाख रूपये का 12.48 लाख लड्डू वितरण किया जा चुका है। इससे समूह को 31.50 लाख रूपये की आय प्राप्त हुई है। प्रति नग लड्डू की दर से समूह के खाते मे विभाग के माध्यम से राशि प्राप्त होती है।
लड्डू टूटे ना इसलिए उसे रखने के लिए समूह को मिठाई का डिब्बा बाहर से लेना पड़ता था, जिससे उन्हें दिक्कत होती थी। इसलिए डिब्बा बनाने हेतु 5 समूह को जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया गया । अब ये समूह मिठाई डिब्बा बनाकर लड्डू प्रदाय करने वाले समूहों को सप्लाई करते है। डिब्बा बनाने मे समूह के माध्यम से एक लाख रूपए की पूंजी लगाया गया, जिससे 13 हजार 335 डिब्बा बनाए गए। प्रति डिब्बा 10 रूपये की दर से अर्थात् 1 लाख 33 हजार रूपये मे बेचने पर समूह को 33 हजार रूपये आमदानी हुई है।अभियान का क्रियान्वयन,निगरानी और मार्गदर्शन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जा रहा है। स्थानीय महिला समूहों की मासिक बैठक आंगबनाड़ी केन्द्रों में किया जा रहा है,इन केन्द्रों में ही बच्चों के लिए लड्डु और उबला अण्डा प्रदान किया जाता है। इस दौरान महिलाओं द्वारा स्वच्छता कुपोषण  और पोषण आहार पर चर्चा की जाती है।

महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को समझते हुए प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। प्रदेश में 15 से 49 वर्ष की 41.50 प्रतिशत महिलाओं के एनीमिया से ग्रसित आंकड़ों को दखते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया है,इसके तहत महिलाओं से कुपोषण दूर करने के लिए गर्म पौष्टिक भोजन के साथ स्थानीय पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गर्भवती और शिशुवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूरक पोषण आहार की व्यवस्था की गई है। टेक होम राशन के अंतर्गत गर्भवती और शिशुवती माताओं को रेडी-टू-ईट फूड दिया जा रहा हैं जिसमें रागी व मूगफली का समावेश रहता है। महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आंगनवाड़ियों के माध्यम से अलग अलग मेन्यू अनुसार गर्म भोजन प्रदान किया जा रहा है। बेटियों के सम्मानपूर्वक विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत प्रति जोड़ा अनुदान राशि 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है, इसमें 20 हजार तक का दैनिक उपयोग का सामान नव वधु को आगामी सुखमय गृहस्ती के लिए दिया जाता है। योजना के तहत हजारों बेटियों का विवाह कराया गया है। मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती धात्री महिलाओं को प्रथम जीवित संतान के लिए तीन किश्तों में 5 हजार रूपए का भुगतान किया जा रहा है जिससे उसे आर्थिक या सामाजिक तंगी के कारण गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक आजीविका के लिए काम न करना पड़े। मैदानी स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के महत्व और योगदान को देखते हुए उनके मानदेय में 1 जुलाई 2019 से वृद्धि की गयी है। कामकाजी महिलाओं के लिए पांच नये वसति गृहों की स्वीकृति देते हुए बजट में प्रावधान किया गया है।

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