NPG स्पेशल : CM भूपेश की बाड़ी योजना बनी इन किसानों के लिए वरदान…..कोरोना भी कुछ नहीं बिगाड़ पाया इन अन्नदाताओं का ….घर बैठे कमा रहे हैं हर दिन हजारों रुपये

कोरबा 2 मई 2020। कोरोना की विपदा में देश की हरियाली भी विरान सी दिख रही है। रोजगार छिन गये हैं…उद्योग-धंधे बंद हैं…बाजार सुनसान पड़े  हैं….और इन सबके बीच जिन दो वर्गों के भविष्य पर भीषण संकट की छाया है, वो है किसान और दूसरा कामगार…। ….लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता ने इन दो वर्गों के लिए कोरोना संकट की ऐसी काट ढूंढ निकाली है, जिससे मजदूरों के चेहरे भी खुशियों से चमक रहे हैं और किसान भी खुशी से चहक रहे है। मनरेगा के जरिये कामगारों को जहां घर के करीब ही रोजगार मिल रहा है…तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने अपनी अति महात्वाकांक्षी बाड़ी योजना के जरिये सब्जी उत्पादक किसानों को घर बैठे कमायी का ब़ड़ा जरिया दे दिया है। 

ऐसे वक्त जब कोरोना ने पूरे देश को बंधक सा बना लिया है…त्रासदी में जब लोगों का घरों से कदम निकालना भी दूभर है…कमायी के तमाम रास्ते बंद पड़ें…उस मुश्किल घड़ी में भी कोरबा के सब्जी उत्पादक किसान हर दिन हजारों रुपये घर बैठे कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बाड़ी योजना ने किसानों को बड़े पैमाने पर जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। कोरबा का वो इलाका कटघोरा जिसने कोरोना की विपदा सबसे ज्यादा झेली, वहां के सब्जी उत्पादक किसान अब बाड़ी में उगाये गये सब्जी को जिला प्रशासन की तरफ से निर्धारित मिनी मंडी में ले जाकर बेच रहे हैं और बिना बाजार में घंटों वक्त गुजारे ही अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री की पहल पर बाड़ी योजना के तहत इस दफा किसानों ने सब्जी की बम्पर खेती की थी। हरी-भरी बाड़ी किसानों को तगड़ी कमायी की उम्मीद जगा रही थी, लेकिन तभी कोरोना ने इस कदर कोरबा को अपनी आगोश में ले लिया कि अन्नदाताओं की आस टूटने लगी। कोरबा की बात करें तो  जिले के कटघोरा से 27 कोरोना संक्रमित मरीजों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कटघोरा में कम्पलीट लाॅक डाउन कर सारी सीमाओं को सील कर दिया था। ऐसे में कटघोरा विकासखंड के जुराली-कसनिया जैसे गांव में सब्जी की खेती करने वाले 500 से अधिक किसानों के सामने सब्जी की बम्पर फसल बाजार के अभाव में खेत में ही बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा।’

किसानों के चेहरे मुरझाने लगे थे, ऐसे में मुख्यमंत्री की पहल और कलेक्टर किरण कौशल की कोशिशों ने किसानों की बेरंग होती दुनिया को रंगीन बना दिया। कोरबा कलेक्टर किरण कौशल ने कटघोरा के हाई स्कूल को लाॅजिस्टिक सेंटर बनाया। यहां उद्यानिकी विभाग के जवाबदार अफसरों की निगरानी में किसानों के खेत से पहुंचने वाली सब्जियों को सस्ती और किफायती दर में बेचने की व्यवस्था बनाई गयी। कलेक्टर किरण कौशल के इस प्रयास के बाद किसानों के चेहरे अब उत्साह से खिल गये है, ग्राम जुराली और कसनिया के किसान रोजाना 15 से 20 क्विंटल सब्जी कटघोरा के हाई स्कूल में लाकर वालिंटियर के माध्यम से अच्छी कीमतों पर उसे बेच रहे है।

सब्जियों का उत्पादन बढ़ने से लाॅक डाउन में भी कोई समस्या नहीं- किरण कौशल

कटघोरा के हाॅट-स्पाॅट बनने के बाद जिले से बाहर जाने और बाहर से जिले में आने पर पूरी तरह से पाबंदी  है। इस कम्पलीट लाॅक डाउन में दूसरे हाॅट-स्पाॅट वाले प्रदेशों से कोरबा आने वाली सब्जी की गाड़ियों पर भी काफी हद तक पाबंदी लगाई गई है, ताकि कोरोना का संक्रमण ना बढ़े । बाहर से आने वाली सब्जियों पर रोक के बाद भी जिले में लाॅकडाउन के दौरान हरी सब्जियों की कमी नही हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बाड़ी योजना के सफल क्रियान्वयन के कारण पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार दोगने किसानों ने सब्जी की खेती की थी। यही वजह है कि किसानों को गोठानों से मिले वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद की मदद मिलने से कोरबा में सब्जी का बम्पर उत्पादन हुआ। लाॅक डाउन के बाद भी कलेक्टर किरण कौशल के प्रयासों से किसानों के खेतो से सब्जियों को बाजार तक पहुंचने की सही व्यवस्था बनायी गयी, जिसका नतीजा रहा कि कोरबा में बाहर से सब्जियों का खेप नही पहुंचने के बाद भी आम लोगों को सस्ती कीमत में ताजी हरी सब्जियां आज भी उपलब्ध हो रही है।

कलेक्टर किरण कौशल कहती है कि बाहर के राज्यों से आने वाली सब्जियों पर डिपेेंडेंसी कम करने के लिए आने वाले दिनों में कोरबा में ही जलवायु के मुताबिक ऐसी सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जो कि दूसरे प्रदेशो में होती है। इस कार्ययोजना के बाद आने वाले दो महीनों के भीतर दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियों के बजाये उनकी उपज अपने ही जिले में पूरी तरह से करने का सफल प्रयास किया जायेगा, जिसका सीधा फायदा न केवल किसानों को बल्कि कोरबा के आम लोगों को भी होगा। हमारी कोशिश उन बड़े सब्जी उत्पादक किसानों के लिए एक ऐसा माध्यम बनाने की भी होगी, जिसके जरिये वो ना सिर्फ कोरबा जिले, बल्कि उसे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनी सब्जी को बेच करेंगे।

बाड़ी योजना से तीन गुना बड़ा सब्जी का प्रोडक्शन- दिनकर

कोरोना के हाॅट-स्पाॅट बने कटघोरा में किसानों की सब्जियों की व्यवस्थित खपत की जवाबदारी कलेक्टर किरण कौशल ने वरिष्ठ उद्यानिकी विकास अधिकारी टी.आर.दिनकर को सौंपी है। उद्यानिकी विभाग के अफसर दिनकर की माने तो पिछले वर्ष तक कोरबा जिले में 10 हजार 600 किसान बाड़ी में सब्जी की खेती कर करीब 30 हजार क्विंटल सब्जी का उत्पादन किया करते थे, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के महत्वाकांक्षी बाड़ी योजना की नींव रखे जाने के बाद किसानों ने इस योजना में दिलचस्पी दिखाई और मौजूदा वक्त में कोरबा जिला मेें 19 हजार 905 किसान बाड़ी योजना के तहत सब्जी की खेती कर पहले की अपेक्षा तीन गुना करीब 90 हजार क्विंटल सब्जी का बम्पर उत्पादन कर रहे है। कटघोरा में कोरोना का हाॅट-स्पाॅट बनने के कारण हुए कम्पलीट लाॅक डाउन से किसानों के चेहरे शुरू में कुछ वक्त तक फसल बर्बाद होने की चिंता को लेकर मायूस थे। लेकिन कलेक्टर किरण कौशल ने समय रहते कटघोरा क्षेत्र के किसानों की सब्जियों को कटघोरा में खपाने की सफल कार्य योजना तैयार किया गया, ठीक इसी तरह जिले के अन्य क्षेत्रों से भी रोजाना हजारों क्विंटल सब्जी बाजारों में सीधे पहुंच रहे है। जिससे न केवल किसान फायदा कमा रहे है, बल्कि आम लोगों को लाॅक डाउन के बीच भी सस्ती और ताजी सब्जियां मिल रही है।

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