NPG Exclusive-सीबीआई ने इन धाराओं में दर्ज किया मुकदमा, अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर का मतलब क्या है….पढ़िये किन धाराओं के तहत सीबीआई जांच को अंजाम तक पहुंचाएगी

NPG.NEWS
रायपुर,5 फ़रवरी 2020। NGO मामले में CBI ने हाईकोर्ट के आदेश पर जो FIR दर्ज की है, उसकी सूचना एडिशनल सॉलीसीटर जनरल गोपा कुमार ने हाईकोर्ट की युगल पीठ को सुनवाई के दौरान दे दी है।
यह FIR अभी CBI के पोर्टल पर ऑनलाइन नज़र नहीं आ रही है लेकिन कुछ घंटों में यह नुमाया हो जाएगी। CBI ने इस मामले में FIR के लिए हाईकोर्ट के आदेश का ज़िक्र किया है, लेकिन और क्या ब्यौरा दर्ज किया गया है इसका खुलासा नहीं है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को पारित आदेश में CBI को सात दिवस के भीतर FIR करने के निर्देश दिए थे। इस निर्देश के साथ आदेश में उल्लेखित था कि याचिकाकर्ता ने रिट में क़रीब एक दर्जन से अधिक एक्स I.A.S. और मौजुदा I.A.S. क़ा नाम दर्ज कराया है।
अब CBI ने जो धाराएँ दर्ज की है उनको लेकर जो जानकारी है, वो बताती है कि CBI ने भोपाल में क्राईम नंबर RC 222/2020 के तहत FIR किया है और उसमें जो धाराएँ है वो हैं –
“420.409.467,468,471, प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट १३(१), १३ (१) (बी)”

अब ज़रा यह समझ लीजिए कि किन परिस्थितियों में यह धाराएँ आकर्षित होती हैं, यह है इन धाराओं का ब्यौरा –

४२० – किसी संपत्ति को छलपूर्वक हड़पना
४०९ – लोक सेवक होते हुए किसी शासकीय धन राशि को स्वयं में न्यस्त करना .. न्यासभंग
४६७ – कूट रचित दस्तावेज के आधार पर छल करना
४६८ – कूटरचित दस्तावेज को सही होना बताते हुए उसका उपयोग धोखाधड़ी के लिए करना
४७१ – कूटरचित दस्तावेज़ों के आधार पर यह जानते हुए कि वे कूटरचित हैं उनका उपयोग करते हुए धोखाधड़ी करना

प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट १३(१), १३ (१) (बी)-शासकीय लोकसेवक के द्वारा भ्रष्टतापूर्ण आचरण करते हुए लाभ अर्जित करना

यदि नामजद आरोपी के स्थान पर अज्ञात लिखा है तो इसके मायने यह हैं कि शीर्ष जांच एजेंसी किसी को भी बुलाकर पूछताछ कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने सीधे तौर पर किसी को आरोपी के रुप में दर्ज करने के निर्देश सीबीआई को नहीं दिए हैं, इसलिए जांच के आधार पर सीबीआई नामजद आरोपी बनाएगी।

Spread the love