शिक्षक भर्ती में बस्तर, सरगुजा और कोरबा में स्थानीय भर्ती करने के खिलाफ अब डीएड/बीएड संघ जाएगा न्यायालय… याचिका दायर करने की शुरू हुई तैयारी… संघ के सचिव ने थामी बागडोर

रायपुर 11 जनवरी 2020। नियमित शिक्षक भर्ती के नियम कानून को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है जैसे-जैसे भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ते जा रही है वैसे-वैसे न्यायालय में दायर होने वाले याचिकाओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है । शिक्षाकर्मियों, नियमित शिक्षकों ने भर्ती के कुछ बिंदुओं को लेकर पहले से याचिका दायर कर रखी है जो की सुनवाई के अंतिम चरण में है और कभी भी निर्णय आ सकता है , उसके बाद आर्ट्स सब्जेक्ट के बेरोजगारों ने याचिका दायर की है जिस पर भी सुनवाई जारी है । इसके अलावा एनआईओएस के माध्यम से डीएलएड कोर्स करने वाले प्रतिभागी भी उन्हें न लेने की स्थिति में न्यायालय जाने को तैयार बैठे हैं और यदि उन्हें लिया जाता है तो उसके विरोध में रेगुलर डीएलएड कोर्स वाले प्रतिभागी न्यायालय जा सकते हैं और इन दोनों के बीच रस्साकशी और बहसबाजी का दौर जारी है ।

 

इधर यह मामला थमा भी नहीं है कि जैसे ही सहायक शिक्षक परीक्षा में पास अभ्यार्थियों के दस्तावेज परीक्षण का प्रपत्र सामने आया एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है । दरअसल दस्तावेज परीक्षण से राज्य के 14 जिलों को जो कि बस्तर और सरगुजा संभाग समेत कोरबा जिले से आते हैं को दूर रखा गया है क्योंकि यहां 2012 से चले आ रहे नियमों के मुताबिक तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर केवल और केवल स्थानीय अभ्यर्थियों की ही भर्ती होनी है और इस नियम को नई सरकार ने अब 2021 तक बढ़ा दिया है ऐसे में अब इन 14 जिलों के पदों पर केवल वहां के मूल निवासियों की भर्ती होगी इसलिए फिलहाल वहां के पदों के लिए दस्तावेज परीक्षण नहीं किया जा रहा है इधर यह बात सामने आते ही जहां स्थानीय उम्मीदवारों में हर्ष व्याप्त है वहीं मैदानी इलाकों के उम्मीदवारों में नाराजगी और अब इस लड़ाई में न्यायालय में याचिका लगना तय हो गया है ।

छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड/बीएड संघ के सचिव सुशांत धराई इसका नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने स्वयं फेसबुक लाइव के जरिए न्यायालय में याचिका दायर करने का ऐलान किया है यही नहीं उन्होंने याचिका दायर करने के लिए अपने साथियों को इकट्ठा करना भी शुरू कर दिया है और उनके फेसबुक पोस्ट के मुताबिक वह जल्द ही याचिका लगाने जा रहे हैं । इधर सीटेट पास उम्मीदवारों को भी मौका दिए जाने का विरोध सीजी टेट पास उम्मीदवार कर रहे हैं और हो सकता है कि इस मामले में भी कुछ अभ्यार्थी न्यायालय का दरवाजा खटखटा दे…. कुल मिला कर नई शिक्षक भर्ती के अधिकांश मामलों का निराकरण न्यायालय से ही हो पाएगा ऐसा दिखाई दे रहा है और ऐसे में भर्ती प्रक्रिया का लेट होना भी संभावित है क्योंकि जिस भी पक्ष को खुद के साथ अन्याय होता दिखेगा उसका न्यायालय जाना तय है, आखिरकार लगभग 23 सालों बाद शिक्षक पद पर नियमित भर्ती होने जा रही है ऐसे में कोई भी इस अवसर को नहीं चूकना चाहता है और एक-एक अंक की लड़ाई उन्हें नौकरी पर या नौकरी से दूर ले जा सकती है ।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर चल रही बहस न्यायालय के दरवाजे पर जाकर न्याय मांगते हुए नजर आ रही है और यह सिलसिला लंबा चलेगा ऐसा तय नजर आ रहा है ।

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