छत्तीसगढ़ सूचना आयोग और राज्य शासन को हाईकोर्ट का नोटिस……..पर्यावरण प्रेमी नितिन सिंघवी की याचिका पर हुई सुनवाई

रायपुर/बिलासपुर 19 जनवरी 2021। छत्तीसगढ़ में ब्लॉक स्तर तक के प्रत्येक कार्यालय को सूचना का अधिकार के तहत लोक प्राधिकारी मानने के आदेश निकालने के कारण तथा उस आदेश को सूचना आयोग द्वारा उचित ठहराने के कारण आज मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्रन मेनन एवं न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की डबल बेंच ने छत्तीसगढ़ सूचना आयोग तथा राज्य शासन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है.

रायपुर निवासी याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने रिट दायर कर कोर्ट को बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने छत्तीसगढ़ के सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ब्लॉक स्तर तक के प्रत्येक कार्यालय को लोक प्राधिकारी घोषित कर दिया और बाद में सूचना आयुक्त ने भी सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश को सही बताते हुए राज्य के ब्लॉक स्तर तक के प्रत्येक कार्यालय को लोक प्राधिकारी घोषित कर उसी कार्यालय में आवेदन लगाने के लिए आदेशित किया जहां पर सूचना हो.

सिंघवी ने बताया कि पूरे प्रदेश में ब्लाक स्तर तक दसों हजार कार्यालय हैं ऐसे में राज्य सूचना आयोग तथा सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के बाद पूरे प्रदेश में अव्यवस्था का आलम हो गया. आवेदक को सोचना पड़ता है कि सूचना प्रदेश के ब्लॉक स्तर तक के किस कार्यालय में है तथा आवेदन कहां लगाएं? जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विभाग प्रमुख ही लोक प्राधिकारी होता है. ऐसे में आवेदक छत्तीसगढ़ में किसी विभाग के ब्लॉक स्तर तक के किसी भी कार्यालय में आवेदन लगाकर उसी विभाग के दूसरे कार्यालय की जानकारी प्राप्त कर सकता है. जैसे कि सिंचाई विभाग बीजापुर में आवेदक आवेदन लगाकर सिंचाई विभाग सरगुजा की जानकारी प्राप्त कर सकता है और ऐसे में बीजापुर के जन सूचना अधिकारी को उसी के सरगुजा कार्यालय से जानकारी बुलाकर आवेदक को देनी पड़ेगी, अगर उसी विभाग के किसी ब्लॉक स्तर के कार्यालय में सूचना हो तो वहां से बुला करके देनी पड़ेगी.

सिंघवी ने चर्चा में बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू होने के पश्चात वर्षों से अधिनियम के इस प्रावधान का पालन हो रहा था और आवेदक आराम से सूचना प्राप्त कर रहा था. परंतु राज्य सूचना आयुक्त के वर्ष 2018 के आदेश के बाद अब आवेदक यह पता लगाने के लिए भटकता है की जानकारी कहां होगी तथा आवेदन कहां लगाना है.

याचिका में यह भी बताया गया की संभाग स्तर या जिला स्तर के नीचे के कार्यालय में सिर्फ सहायक जन सूचना अधिकारी ही रह सकते हैं जो सिर्फ आवेदन की पावती दे सकते हैं परंतु सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के बाद ब्लॉक स्तर के अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत अब लोक प्राधिकारी बन गए हैं तथा लोक प्राधिकारी और जन सूचना अधिकारी बनकर कार्य कर रहे हैं.

याचिका में उदाहरण प्रस्तुत कर बताया गया कि हाल में सर्वोच्च न्यायालय ने एक प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय विरुद्ध सुभाष चंद्र अग्रवाल में कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय दो अलग-अलग लोक प्राधिकारी नहीं हो सकते.

याचिका में यह भी बताया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग कोई भी नियम सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 27 के तहत बना सकता है परंतु इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने बिना धारा 27 की अधिसूचना जारी किए ब्लॉक स्तर के प्रत्येक कार्यालय को लोक प्राधिकारी घोषित कर दिया.

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