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हिन्दी की चिंता करने की जरूरत नहीं…हिंदी समृद्ध और शक्तिशाली है…महानदी की तरह प्रवाहमान -प्रो0 चक्रवाल

0 सेंट्रल यूनिवर्सिटी कैंपस में 15 हजार पौधारोपण का लक्ष्य दिया कुलपति ने, औषधीय और फलदार पेड़ों पर जोर

बिलासपुर, 14 सितंबर 2021। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि हिंदी की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हिंदी भाषा समृद्ध एवं शक्तिशाली है, जो सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखती है। हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जो राष्ट्र को उत्तर से दक्षिण एवं पूर्व से पश्चिम तक एक सूत्र में बांधती हैं। भाषा के विकास में हमारा, समाचार पत्रों, सोशल मीडिया एवं साहित्य सभी का योगदान है। हमें सिर्फ भाषा से प्रेम करने की आवश्यकता है उसका विकास स्वयं हो जाएगा।
हिन्दी दिवस पर विवि में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति महोदय ने अपनी पुस्तक प्रतिबिंब के कुछ अंश साझा किये। उन्होंने कहा कि भाषा स्वयं प्रवाह तय करती है और हिंदी भाषा महानदी के समान प्रवाहमान है, जिसका वेग एवं प्रभाव सदा एक समान रहता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निकष परमार वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार रहे। इसके अतिरिक्त मंचस्थ अतिथियों में कुलसचिव प्रो. शैलेंद्र कुमार, अधिष्ठाता कला विद्यापीठ प्रो. डी.एन. सिंह एवं विश्वविद्यालय के राजभाषा अधिकारी अखिलेश कुमार तिवारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रांरभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती तथा संत गुरु घासीदास बाबा के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ। परंपरा के अनुसार सभी मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किताब से किया गया। विश्वविद्यालय के राजभाषा अधिकारी ने स्वागत उद्बोधन दिया। तत्पश्चात कला विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. डी.एन. सिंह ने हिंदी दिवस के पावन अवसर पर मीडिया में हिंदी की चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर अपने विचार रखे।
हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ. राजेश मिश्रा की नवप्रकाशित पुस्तक उत्तर आधुनिक कथा लेखन और मनोहर श्याम जोशी का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। इसके पश्चात माननीय कुलपति जी द्वारा स्मृति चिह्न एवं शॉल व श्रीफल भेंट कर मुख्य अतिथि श्री निकष परमार का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. शैलेन्द्र कुमार ने किया। संचालन डॉ. गौरी त्रिपाठी सह-प्राध्यापक हिंदी विभाग ने किया।
कुलपति प्रो0 चक्रवाल ने विश्वविद्यालय के नवीन आईटी कार्यशाला के सामने पहला पौधा औषधीय गुणों से युक्त, वृक्षीय सुंदरता एवं सदाबाहर खुशबूदार मौलश्री का रोपण किया। विश्वविद्यालय में चारों ओर हरियाली है ऐसे में प्रकृति की वंदना करने से नई ऊर्जा और स्फूर्ति मिलती है।
पौधारोपण के अवसर पर उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में 15 हजार पौधों का रोपण विश्वविद्यालय परिसर में होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश उपरांत एक पौधे का रोपण कराकर उसे संरक्षित करने का दायित्व प्रदान किया जाना चाहिए। अगले तीन से पांच वर्षों तक वे उसे पौधे से पेड़ के स्वरूप में परिवर्तित होते देख सकें। जो निश्चित रूप से उनके जीवनकाल का सर्वोत्तम अनुभव हो सकता है। उन्होने वानिकी विभाग परिसर में भी पौधे लगाए।

 

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