NHRC अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू की सरलता ने मन मोहा.. प्रेस से बोले – “मैं हिंदी समझता हूँ पर बोलने में सहज नहीं हूँ.. मुझे इसका खेद है.. मैं इसे बेहतर कर रहा हूँ” “NHRC के दांत शायद आज नहीं हैं, पर उग रहे हैं”

रायपुर,13 फ़रवरी 2020। NHRC की खुली जनसुनवाई के बाद NHRC की बेंच अपने अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू के साथ प्रेस से मुख़ातिब हुई। सवालों के शुरुआत में ही NHRC अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू ने प्रेस से विनम्रता से कहा –

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“मैं हिंदी समझता हूँ पर हिंदी कहने में सहज नहीं हूँ.. हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है.. और मैं समझ बेहतर कर रहा हूँ.. हिंदी में सहजता से ना बोल पाने का मुझे खेद है”

जस्टिस दत्तू ने मानवाधिकार आयोग के नख विहीन शेर होने के मसले पर मुस्कुराते हुए कहा

“हमें फ़िलहाल अनुशंसा का अधिकार है, पर राज्य या संस्था उसे माने यह बाध्यता नहीं है, हालाँकि NHRC की सिफ़ारिशों को माने जाने की दर 99 फ़ीसदी है। केंद्र सरकार से अधिकार को लेकर आग्रह किया गया है”

जस्टिस दत्तू ने कहा –

“हाँ आज दांत शायद नहीं हैं .. पर उग रहे हैं”

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