NGO प्रकरण: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की कैविएट.. हाईकोर्ट में एक्स I.A.S. की रिव्यू याचिका पर चीफ जस्टिस ने स्पेशल बेंच बनाने का दिया आदेश

बिलासपुर, 3 फ़रवरी 2020। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित काग़ज़ी NGO के मामले में दायर जनहित याचिका पर CBI जाँच के आदेश के ख़िलाफ़ राहत पाने की क़वायदें तेज हैं, लेकिन अदालत में मूल याचिकाकर्ता ने भी अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी है।
मूल याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दिया है। कैविएट का अर्थ है कि 6 जनवरी को हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा जनहित याचिका 53/2018 पर आए फ़ैसले के विरुध्द दायर किसी अपील या कि रिव्यू पर फ़ैसला देने के पहले सक्षम न्यायालय कैविएट दायर करने वाले का पक्ष भी सूने।
इधर हाइकोर्ट में NGO मामले में CBI को निर्देशित कार्यवाही के केंद्र में माने जा रहे नामांकित I.A.S. अधिकारियों में एक रहे बी एल अग्रवाल ने हाईकोर्ट में रिव्यू पीटिशन का आवेदन दिया था। मामले का रिव्यू करने के लिए चीफ जस्टिस ने आज शाम विशेष बेंच बनाने का आदेश दे दिया। चीफ जस्टिस के आदेश के बाद अब जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस पीसी साहू की सिर्फ बीएल अग्रवाल के केस के लिए बेंच गठित होगी। चूकि, इसी बेंच ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जाहिर है रिव्यू करने का अधिकार भी इसी बेंच को होगा।
पूर्व I.A.S. बाबूलाल अग्रवाल के रिव्यू पीटिशन के आधार में प्रमुख दो बिंदु शामिल है,जिनमें पहला बी एल अग्रवाल ने इस NGO के संचालन पर उनके पदीय दायित्व और नाम के शामिल होने पर अनभिज्ञता जताई है और दूसरा यह कि, कोर्ट में उन्हें पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया है।
