जब साथ दिखे भैयालाल और अंबिका सिंहदेव तो खुद मुख्यमंत्री बघेल ने ली तस्वीर.. और प्रतिनिधिमंडल से कहा - "नहीं होगा कोरिया साथ अन्याय, विषय ज़िला गठन नहीं है.. परिसीमन है..ज़िले की घोषणा तो हो चुकी" प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भी की मुलाक़ात

रायपुर,23 अक्टूबर 2021। कोरिया ज़िले विभाजन के मसले पर पक्ष रखने और न्याय संगत बँटवारे का आग्रह करने पहुँचे बैकुंठपुर निवासियों के प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाडे और वर्तमान विधायक अंबिका सिंहदेव को एक साथ देख मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद एक तस्वीर अपने मोबाइल पर ले ली। वहीं प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि कोरिया का अहित नहीं होगा।कोरिया के इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भी मुलाक़ात की है।
दरअसल कोरिया ज़िले से ही टूटकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर ज़िला बनना है, इस नए ज़िले के निर्माण में कोरिया के जो हिस्से शामिल होने हैं उन्हें लेकर कोरिया की असहमति है और उनके अपने तर्क हैं।कोरिया ज़िला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में इस मसले को लेकर कोरिया बचाव आंदोलन 63 वें दिन तब समाप्त हुआ जबकि खुद मुख्यमंत्री बघेल ने इसे समाप्त करने का आग्रह करते हुए आश्वस्त किया"कोरिया के साथ अन्याय नहीं होगा"
कोरिया बचाव मंच का प्रतिनिधि मंडल जो कि सर्वदलीय था, उससे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री बघेल नेप्रतिनिधिमंडल में भाजपा सरकार में मंत्री रहे भैयालाल राजवाडे और वर्तमान कांग्रेस विधायक अंबिका सिंहदेव को साथ खड़े देख मोबाइल निकाला और यह कहते हुए दोनों को छोड़ सबको बैठाया और यह कहते हुए तस्वीर ली -"यह यादगार पल है कि ज़िले के मुद्दे क्षेत्र के हित को लेकर सारे राजनैतिक मतभेद भूल कर दोनों साथ आ गए हैं.. मैं इसे हमेशा रखूँगा"
बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुए संवाद में मुख्यमंत्री बघेल ने सबकी बात सुनी और कहा "मुझे पता नहीं था इतना विवाद है वहाँ.. आप लोग पहले क्यों नहीं आए, यह स्थिति निर्मित ही नहीं होती"
प्रतिनिधिमंडल ने आँकड़ों के साथ कोरिया के साथ विसंगतियों को क्रमवार बतलाया। मुख्यमंत्री बघेल ने फिर दोहराया"परिसीमन जब होगा, दावा आपत्ति जब होगी, तब वहाँ प्रस्ताव दीजिए वह कलेक्टर के ज़रिए राज्य सरकार के पास आएगा और निश्चिंत रहिए कोरिया के साथ कोरिया के हितों के साथ अन्याय नहीं होगा"
इसके ठीक बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा"विषय नया ज़िला गठन नहीं है… वह तो घोषणा हो चुकी..मसला परिसीमन है.. राज्य सरकार उस पर पूरी सहानुभूति से तथ्यों को देखते हुए विचार करेगी"
इसके ठीक बाद कोरिया बचाव मंच का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल अनुसुइया उइके के पास पहुँचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल
को खड़गंवा जनपद से पारित प्रस्ताव समेत पचास ग्रामसभा के प्रस्ताव सौंपे। इन पारित प्रस्ताव में बैकुंठपुर ( कोरिया ) से जुड़ने का प्रस्ताव पारित है। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा"अनुसूची पाँच क्षेत्रों में ग्रामसभा सर्वोच्च है,मैं इन सबका अध्ययन करुंगी और संविधान के अनुरुप कार्यवाही होगी"
जिस मसले पर गतिरोध है वह मसला अनुपातिक बँटवारे का मसला है। कोरिया बचाव मंच खड़गंवा विकासखंड को कोरिया ज़िले के साथ जोड़े रखने के आग्रह पर है। पाँचवी अनुसूची क्षेत्र होने के नाते ग्रामसभाओं को मिले विशिष्ट अधिकार उनके पारित प्रस्ताव को अकाट्य और सर्वोच्च बना देते हैं, और खड़गंवा विकासखंड के क़रीब 77 ग्राम पंचायतों में से पचास ने प्रस्ताव पारित कर खुद को बैकुंठपुर से अलग नहीं किए जाने की बात कह दी है।
इस मसले पर एक पेंच यह भी है कि विकासखंड का बँटवारा नहीं हो सकता है, या तो कोई विकासखंड पूरा शामिल होगा या पूरी तरह नहीं होगा। अब जैसा कि खड़गंवा जनपद के पारित प्रस्ताव के साथ साथ पचास ग्राम सभाओं के पारित प्रस्ताव मौजुद हैं तो यह मसला भी है कि चिरमिरी का क्या होगा ? चिरमिरी खड़गंवा विकासखंड का हिस्सा है, लेकिन ज़िले के जिस नाम को मंज़ूरी दी गई है वह नाम मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर है। ज़ाहिर है पेंच तकनीकि रुप से उलझ गए हैं। निदान कैसे निकलता है और क्या निकलता है यह देखना दिलचस्प होगा।
