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सेना के सर्वाेच्च पदों पर जाने के लिए दुर्ग की बेटियां ले रही एनडीए की निःशुल्क कोचिंग – डीएमएफ के माध्यम से निःशुल्क कोचिंग कर परीक्षाओं की तैयारी करने वाला प्रदेश का पहला जिला और संभवतः ऐसी पहल करने वाला देश का पहला जिला बना दुर्ग

सेना के सर्वाेच्च पदों पर जाने के लिए दुर्ग की बेटियां ले रही एनडीए की निःशुल्क कोचिंग – डीएमएफ के माध्यम से निःशुल्क कोचिंग कर परीक्षाओं की तैयारी करने वाला प्रदेश का पहला जिला और संभवतः ऐसी पहल करने वाला देश का पहला जिला बना दुर्ग
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By NPG News

दुर्ग 25 सितंबर 2021। सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के लिए सेना के सर्वाेच्च पदों का रास्ता खोल दिया है। बरसों से इस दिन का इंतजार कर रही बेटियों से यह मौका चूक न जाए, इसके लिए पूरा प्रयास जिला प्रशासन दुर्ग द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप लड़कियों को सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए तैयार करने के लिए एनडीए की निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। डीएमएफ के माध्यम से इसके लिए संसाधन देकर बेटियों को एनडीए की निःशुल्क कोचिंग प्रदान की जा रही है। कोचिंग के लिए लड़कियों का रूझान बहुत ही सकरात्मक है। विशेषज्ञों द्वारा एनडीए की कोचिंग का संचालन प्रतिदिन 3 घंटे किया जा रहा है। जो कि काफी लंबे समय से इसी दिशा में बच्चों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। बच्चों के लिखित परीक्षा के साथ ही फिजिकल ट्रेनिंग की व्यवस्था भी कराई जा रही है। फिजिकल ट्रेनिंग दे रहे विनोद नायर मैराथन चैंपियन रहे हैं। उनके द्वारा प्रशिक्षित एक हजार परीक्षार्थी आर्मी और पुलिस में चयनित हो चुके हैं। कोचिंग की व्यवस्था देख रहे एडीपीओ समग्र शिक्षा अभय जयसवाल ने बताया कि हम लोगों ने स्कूल-स्कूल जाकर सभी लड़कियों से बातचीत की। जिन लड़कियों का रुझान फौज में जाने का था और इसके लिए जिनके भीतर गहरी प्रतिभा और लगन हमें दिखीं, उन्हें हमने चुना। अब तक 18 लड़कियां कोचिंग के लिए चुनी जा चुकी है और इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डीईओ श्री प्रवास सिंह बघेल ने बताया कि बच्चों के लिए स्टडी मटेरियल के अलावा हर संभव सुविधा दी जा रही है ताकि उन्हें सबसे अच्छी शिक्षा मिल पाये। इसके लिए क्लासेज सेक्टर 6 में लगाई जा रही हैं। सहायक संचालक डाॅ. बी. रघु ने बताया कि लड़कियों में जबरदस्त उत्साह है। वे समय पर पहुँचती हैं और मन लगाकर पढ़ाई कर रही हैं।
परमाणु फिल्म देखी और फौज का सपना देखा- लड़कियों ने बहुत सुंदर सपने फौज को लेकर देखे थे लेकिन बंदिश होने की वजह से ये पूरे नहीं हो पा रहे थे। जाहन्वी बंजारे ने बताया कि जब उसने परमाणु फिल्म देखी तब फौज में जाकर देश सेवा का जज्बा जागा। एक दिन जब अखबार में देखा कि एनडीए की परीक्षा लड़कियों के लिए भी अब ओपन हैं तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस खुशी में और चार चांद लग गए जब अगले ही दिन अखबार में देखा कि जिला प्रशासन लड़कियों को निःशुल्क कोचिंग दे रहा है।
कैप्टन अभिनंदन के गौरव भरे दृश्य देखे थे- कोचिंग कर रही छात्रा मनीषा यादव ने बताया कि उसने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान न्यूज देखे थे और यह देखा था कि किस प्रकार कैप्टन अभिनंदन ने मिग से पाकिस्तान के एफ 16 को गिरा दिया था। यह बेहद साहसिक कृत्य था और मुझे लगा कि मैं भी इसी तरह का देश के लिए साहस का कार्य करूँ तो मुझे तसल्ली होगी।
पिता का सपना था, बेटी पूरा करने आगे बढ़ रही- आर्मी ज्वाइन करने का सपना पिता प्रेमजी देशमुख का था। यह सपना अधूरा रह गया। बेटी कोमल उनका सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। कोमल ने बताया कि आरके सिंह सर, डेविड सर, सुष्मिता मिश्रा मैडम हमें खूब मन लगाकर पढ़ा रहे हैं।

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