Bengal Politics: बंगाल चुनाव से ठीक पहले बड़ा सियासी भूचाल! गवर्नर सीवी आनंद बोस का इस्तीफा, ममता भड़कीं, केंद्र पर लगाया बड़ा आरोप, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
West Bengal Governor Resigns: बंगाल चुनाव से ठीक एक महीने पहले गवर्नर सीवी आनंद बोस और लद्दाख के LG कवींद्र गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी ने इसे केंद्र का एकतरफा फैसला बताया है।

फोटो: AI जेनरेटेड
नई दिल्ली/कोलकाता 5 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक एक महीने पहले एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। राज्य के गवर्नर सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) और लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) कवींद्र गुप्ता ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है। केंद्र सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि (RN Ravi) को बंगाल का एडिशनल चार्ज (Additional Charge) सौंप दिया है।
ममता बनर्जी का रिएक्शन: 'यह केंद्र का एकतरफा फैसला है'
इस अचानक हुए डेवलपमेंट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है। ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि इस्तीफे की खबर से वह हैरान हैं। उन्होंने खुलासा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें फोन कर सिर्फ आरएन रवि की नियुक्ति की जानकारी दी लेकिन इस फैसले में राज्य सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई। ममता ने आशंका जताते हुए कहा "मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे हैरानी नहीं होगी कि चुनाव से पहले गवर्नर पर कोई राजनीतिक दबाव डाला गया हो। केंद्र को ऐसे एकतरफा फैसलों से बचना चाहिए जो संघीय ढांचे (Federal Structure) को कमजोर करते हैं।
गवर्नर बोस का कार्यकाल: विवादों और 'कोल्ड वॉर' का दौर
सीवी आनंद बोस ने 23 नवंबर 2022 को बंगाल के राज्यपाल का पद संभाला था (वहीं, कवींद्र गुप्ता 18 जुलाई 2025 को लद्दाख के LG बने थे)। बोस का पूरा कार्यकाल ममता सरकार के साथ लगातार टकराव और 'कोल्ड वॉर' के लिए याद किया जाएगा।
राजभवन और राज्य सरकार के बीच प्रमुख विवाद:
VC नियुक्ति विवाद (2023): गवर्नर बोस ने राज्य की सलाह के बिना कई यूनिवर्सिटीज में वाइस चांसलर (VC) नियुक्त कर दिए थे। सरकार ने इसे अधिकारों का हनन बताया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया था।
बिलों पर रोक (2023-24): ममता सरकार ने आरोप लगाया था कि गवर्नर जानबूझकर अहम विधेयकों (Bills) को पास करने में देरी कर रहे हैं जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हो रही है।
समानांतर प्रशासन का आरोप: गवर्नर का सीधे जिलों का दौरा करना और मनरेगा (MNREGA) फंड्स में अनियमितताओं पर सवाल उठाने को राज्य सरकार ने राजनीति से प्रेरित कदम बताया था।
सेक्शुअल हैरेसमेंट विवाद (2024): राजभवन से जुड़ी महिला कर्मचारियों के सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोपों ने दोनों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था। राज्य सरकार ने जांच की मांग की थी जबकि गवर्नर ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था।
अब चुनाव से ठीक पहले आरएन रवि जैसे तेज-तर्रार गवर्नर (जिनका तमिलनाडु में भी राज्य सरकार से टकराव का इतिहास रहा है) को बंगाल भेजने से यह साफ है कि आने वाले दिनों में केंद्र और ममता सरकार के बीच सियासी पारा और भी हाई होने वाला है।
