व्यापमं घोटाले की फाइलें होंगी रिओपन: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार से पूछा, 320 पेज की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
Supreme Court News: व्यावसायिक परीक्षा मंडल व्यापमं महाघोटाले की फाइलें एक बार फिर खुलने वाली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार से पूछा है, 320 पेज की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई या की गई? सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार को अब तक की गई कार्रवाई के संबंध में शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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दिल्ली 26 मार्च 2026, व्यावसायिक परीक्षा मंडल व्यापमं महाघोटाले की फाइलें एक बार फिर खुलने वाली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार से पूछा है, 320 पेज की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई या की गई?
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है, सकलेचा द्वारा की गई 320 पन्नों की विस्तृत शिकायत पर अब तक क्या एक्शन लिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार को अब तक की गई कार्रवाई के संबंध में शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी.अंजारिया की बेंच ने जांच एजेंसी और राज्य शासन को अब तक की गई पूरी जांच और दाखिल चार्जशीट के संबंध में शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने16 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है। याचिकाकर्ता पूर्व विधायक सकलेचा की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा, सर्वम रितम खरे, विपुल तिवारी, इंद्रदेव सिंह मौजूद थे। राज्य शासन की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू, सीबीआई की ओर से अधिवक्ता दविंदर पाल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।
इसलिए हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
व्यापमं घोटाले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सकलेचा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, याचिकाकर्ता इस मामले में सीधेतौर पर प्रभावित पक्ष नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले को सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतकर्ता की भूमिका अहम होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया है।
टाइम लाइन
2014- STF के विज्ञापन के बाद सकलेचा ने पुख्ता दस्तावेजों के साथ शिकायत की।
2015- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच का जिम्मा CBI को सौंपा गया। सकलेचा ने दिल्ली में 320 पन्नों के दस्तावेज सीबीआई को सौंपे।
2016- CBI और STF ने बयान दर्ज किए, फाइलें दब सी गई।
202- किसी तरह की ठोस कार्रवाई न होने पर सकलेचा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
