Begin typing your search above and press return to search.

प्राइवेट पार्ट छूना-पजामे का नाड़ा खींचना रेप का प्रयास: Supreme Court, जानिए क्या था मामला जिस पर इलाहाबाद HC ने की थी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी द्वारा नाबालिग को पकड़ना, पाजामे का नाड़ा तोड़ना और घसीटने की कोशिश करना, ये सब 'पहले से तय मंशा' के साथ बलात्कार के प्रयास की ओर बढ़े हुए कदम हैं, इसलिए ट्रायल कोर्ट के लगाए गए गंभीर आरोप (IPC धारा 376 आदि) को बहाल किया जाता है.

प्राइवेट पार्ट छूना-पजामे का नाड़ा खींचना रेप का प्रयास: Supreme Court, जानिए क्या था मामला जिस पर इलाहाबाद HC ने की थी टिप्पणी
X
By Meenu Tiwari

‘प्राइवेट पार्ट छूना-पजामे का नाड़ा खींचना रेप का प्रयास नहीं’, इस तरह की टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने 20 मार्च 2025 को एक मामले में सुनवाई के दौरान की थी। इस मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस फैसले को ख़ारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी द्वारा नाबालिग को पकड़ना, पाजामे का नाड़ा तोड़ना और घसीटने की कोशिश करना, ये सब 'पहले से तय मंशा' के साथ बलात्कार के प्रयास की ओर बढ़े हुए कदम हैं, इसलिए ट्रायल कोर्ट के लगाए गए गंभीर आरोप (IPC धारा 376 आदि) को बहाल किया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में संवेदनशीलता लाने की जरूरत है. ऐसे मामलों में मानक भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक से जुड़े होने चाहिए, न कि विदेशी अवधारणाओं से उधार लेकर.पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसे चौंकाने वाला और असंवेदनशील बताया था. यह स्वतः संज्ञान वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता द्वारा NGO वी द वुमेन ऑफ इंडिया की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर लिया गया था. शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को यौन अपराधों के मामलों में न्यायाधीशों के नजरिये के लिए दिशा-निर्देश बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि आरोपों के आधार पर हम हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप केवल बलात्कार के अपराध को अंजाम देने की तैयारी के हैं, न कि रेप का प्रयास. आरोपियों की हरकत स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है कि दुष्कर्म के प्रयास के प्रावधानों को लागू करने का मामला बनता है. विवादित निर्णय को रद्द किया जाना चाहिए.

पॉक्सो एक्ट के मामले में बड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (Pocso) एक्ट को लेकर टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के साथ ग्रोपिंग और उसके पायजामे की डोरी खींचना दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास नहीं है, बल्कि गंभीर यौन हमला है. बेंच ने पॉक्सो कोर्ट के विशेष जज के समन आदेश में संशोधन करते हुए नए समन जारी करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि बलात्कार के आरोप में जारी किया गया समन वैध नहीं है.

ये था मामला

आरोपों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कासगंज में पवन और आकाश नाम के आरोपियों ने कथित तौर पर 11 वर्षीय पीड़िता के साथ अश्लील हरकत की और उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी ती. उसे एक पुलिया के पास ले जाने का प्रयास किया. लेकिन एक अन्य शख्स के आने पर आरोपी वहां से फरार हो गए. पटियाली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ था. याचिकाकर्ता आकाश, पवन और अशोक को पहले आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 18 के तहत समन किया जाए. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि आरोपियों पर पॉक्सो कानून की धारा 9/10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के साथ-साथ आईपीसी की धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या बल प्रयोग) के आरोपों के तहत केस चलाया जाए.

Meenu Tiwari

मीनू तिवारी 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया में अनुभव रखती हैं। उन्होंने हरिभूमि, पत्रिका, पेज 9 सहित क्लिपर 28, लल्लूराम, न्यूज टर्मिनल, बोल छत्तीसगढ़ और माई के कोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। वर्तमान में वे एनपीजी न्यूज में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।

Read MoreRead Less

Next Story