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Parents Maintenance Law: माता-पिता की देखभाल नहीं की तो सैलरी से कटेंगे 10,000 रूपये, प्राइवेट जॉब वालों पर भी होगा लागू, इस सरकार ने बनाया सख्त कानून

Telangana Parents Maintenance Law: तेलंगाना सरकार ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नया कानून पेश किया है। माता-पिता की अनदेखी करने पर प्राइवेट और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से 15 प्रतिशत कटकर सीधे पैरेंट्स को मिलेगा।

Parents Maintenance Law: माता-पिता की देखभाल नहीं की तो सैलरी से कटेंगे 10,000 रूपये, प्राइवेट जॉब वालों पर भी होगा लागू, इस सरकार ने बनाया सख्त कानून
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By Ragib Asim

Parents Maintenance Law: तेलंगाना सरकार ने बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने वालों पर नकेल कसने के लिए एक बेहद सख्त कानून पेश किया है। इस नए विधेयक के तहत अब माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 15 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपये तक सीधे काटकर पैरेंट्स के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी (A Revanth Reddy) ने विधानसभा में इस अहम विधेयक को पेश करते हुए कहा कि समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का यह कदम कर्मचारियों को उनके परिवार के प्रति जवाबदेह (Accountable) बनाने के लिए उठाया गया है।

किस पर लागू होगा यह नियम?

यह नया कानून सिर्फ सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) में काम करने वालों पर भी लागू होगा। इस कानून के दायरे में सांसद (MPs), विधायक (MLAs) और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी आएंगे।

इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें परिवार की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए जैविक (Biological) माता-पिता के साथ-साथ 'सौतेले माता-पिता' को भी शामिल किया गया है।

क्या है शिकायत और कटौती की पूरी प्रक्रिया?

कानून को लागू करने के लिए एक फास्ट-ट्रैक और ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाया गया है:

अगर कोई कर्मचारी अपने पैरेंट्स को फाइनेंशियली सपोर्ट नहीं करता है तो माता-पिता सीधे अपने क्षेत्र के जिलाधिकारी (DM) के पास लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • आवेदन में उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति और आय (Income) की पूरी जानकारी देनी होगी।
  • जिलाधिकारी को हर हाल में 60 दिनों के अंदर इस मामले की सुनवाई कर अपना फैसला सुनाना होगा।
  • DM का आदेश जारी होते ही, तय रकम सीधे कर्मचारी के वेतन से कटकर हर महीने माता-पिता के खाते में पहुंच जाएगी।

क्यों पड़ी इस नए कानून की जरूरत?

तेजी से बदलती लाइफस्टाइल (Lifestyle) और शहरों की ओर पलायन के कारण न्यूक्लियर फैमिली (Nuclear Family) का चलन बढ़ा है, जिससे बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। हालांकि भारत में पहले से ही 'वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम 2007' (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) लागू है। यह कानून 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कानूनी अधिकार देता है लेकिन इसकी लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण तुरंत राहत मिलने में दिक्कतें आती हैं। तेलंगाना सरकार ने इसी समस्या को सुलझाने के लिए सीधे सैलरी डिडक्शन (Salary Deduction) का यह प्रैक्टिकल कानून पेश किया है।

बनेगा नया 'वरिष्ठ नागरिक आयोग'

इस कानून को और ज्यादा पावरफुल बनाने के लिए राज्य में एक 'वरिष्ठ नागरिक आयोग' (Senior Citizen Commission) बनाने का भी प्रस्ताव है। इस कमीशन को हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज लीड करेंगे। यह कमीशन बुजुर्गों की शिकायतों और अपीलों को सुनेगा और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा करेगा।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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