Begin typing your search above and press return to search.

OBC Creamy Layer: शादी के बाद महिला की आय का आधार पति या पिता? सुप्रीम कोर्ट सुलझाएगा आरक्षण का सबसे बड़ा पेंच

OBC Creamy Layer: सुप्रीम कोर्ट इस अहम कानूनी सवाल पर सुनवाई कर रहा है कि सरकारी नौकरी में शादीशुदा OBC महिला का 'क्रीमी लेयर' पति की आय से तय होगा या माता-पिता की पेंशन से।

OBC Creamy Layer: शादी के बाद महिला की आय का आधार पति या पिता? सुप्रीम कोर्ट सुलझाएगा आरक्षण का सबसे बड़ा पेंच!
X

फोटो: AI जेनरेटेड

By Ragib Asim

OBC Creamy Layer: सरकारी नौकरी में आरक्षण (Reservation) के लिए एक शादीशुदा OBC महिला का क्रीमी लेयर (Creamy Layer) स्टेटस उसके पति की आय से तय होगा या माता-पिता की आय से? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस बड़े कानूनी पेंच को सुलझाने जा रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कर्नाटक के एक सिविल जज भर्ती मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत का यह फैसला देशभर की लाखों महिला उम्मीदवारों के लिए सरकारी नौकरियों में एक बड़ी नजीर साबित होगा।

विवाद क्या है? (What is the issue?)

कर्नाटक की एक हिंदू नामधारी समुदाय (Category II-A) की महिला ने न्यायिक अधिकारी (Civil Judge) के पद के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती में कुल 57 में से 6 पद II-A श्रेणी के लिए रिजर्व रखे गए थे।

अप्रैल 2018 में शादी के बाद महिला ने अपने पति (Category III-B) की आय के आधार पर जाति प्रमाण पत्र और 'सिंधुत्व' (Sindhutva) सर्टिफिकेट जारी करने का अनुरोध किया था। लेकिन जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने माता-पिता की आय के कारण क्रीमी लेयर के दायरे में आती है जिससे वह आरक्षण के लिए अयोग्य हो जाती है।

क्या हैं तथ्य और बैकग्राउंड (Key Facts)

महिला के माता-पिता दोनों ही क्लास-1 अधिकारी रहे हैं। उसकी मां कर्नाटक न्यायिक सेवा (Karnataka Judicial Service) से जिला न्यायाधीश (District Judge) के पद से रिटायर हुई हैं। वहीं, उसके पिता सहायक वन संरक्षक (Assistant Conservator of Forests) के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

इस फैसले के खिलाफ महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क से सहमति जताते हुए फैसला दिया था कि माता-पिता की पेंशन को भी परिवार की 'आय' (Income) माना जाएगा, जिससे महिला का दावा खारिज कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिए गए?

कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) संजय एम. नुली ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच के सामने दो बड़े कानूनी सवाल रखे:

  • पहला: क्या एक विवाहित महिला उम्मीदवार का क्रीमी लेयर तय करने के लिए पति की आय पर विचार किया जाना चाहिए या उसके माता-पिता की आय पर?
  • दूसरा: अगर माता-पिता की आय को ही आधार माना जाना है, तो क्या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली माता-पिता की 'पेंशन' को आय के रूप में गिना जाना चाहिए या नहीं?

अब क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इस अपील को गंभीरता से लेते हुए कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

कर्नाटक सरकार का जवाब आने के बाद महिला (अपीलकर्ता) को भी एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने की अनुमति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की है।

FAQ: OBC क्रीमी लेयर विवाद से जुड़े मुख्य सवाल

Q: सुप्रीम कोर्ट में OBC क्रीमी लेयर का क्या मामला चल रहा है?

A: विवाद इस बात पर है कि सरकारी नौकरी में शादी के बाद किसी OBC महिला का 'क्रीमी लेयर' स्टेटस उसके पति की आय से तय किया जाना चाहिए या उसके माता-पिता की आय/पेंशन से।

Q: कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला दिया था?

A: कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि माता-पिता की पेंशन को भी परिवार की आय माना जाएगा, जिससे महिला आरक्षण के दायरे से बाहर हो गई।

Q: इस मामले की अगली सुनवाई कब है?

A: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है और इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

Read MoreRead Less

Next Story