Begin typing your search above and press return to search.

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से पूछे सख्त सवाल, जांच में भाग लेने के बाद आपत्ति कैसे?

Supreme Court News: जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से पूछा है कि प्रक्रिया में शामिल होने के बाद अपने खिलाफ हुई आंतरिक जांच को कैसे चुनौती दे सकते हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जांच समिति की रिपोर्ट आने का इंतजार क्यों किया। जस्टिस वर्मा ने कहा था कि समिति को उनके मामले में जांच करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे को लेकर जवाब-तलब किया है।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से पूछे सख्त सवाल, जांच में भाग लेने के बाद आपत्ति कैसे?
X

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

Supreme Court News: दिल्ली। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की डिवीजन बेंच में जस्टिस वर्मा द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई हुई। जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ चल रहे आंतरिक जांच को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। आंतरिक जांच रिपोर्ट जस्टिस वर्मा के प्रतिकूल है। जांच रिपोर्ट में उनको दोषी ठहराया गया है।

रिट याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा यह याचिका दायर ही नहीं की जानी थी। याचिकाकर्ता को कहा कि आपका मुख्य मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। याचिकाकर्ता जस्टिस वर्मा की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे। अधिवक्ता सिब्बल ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि किसी जज को केवल संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत ही हटाया जा सकता है, न कि आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट पर आधारित सार्वजनिक बहस के ज़रिए।

अधिवक्ता सिब्बल ने डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए तर्क दिया, अनुच्छेद 124 के तहत प्रक्रिया है। उससे पहले, किसी जज पर सार्वजनिक बहस नहीं हो सकती। प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष या लोकसभा या राज्यसभा के सभापति के माध्यम से दायर किया जाता है। उस स्तर तक वह प्रक्रिया सदन की नहीं होती, प्रक्रिया सदन के बाहर होती है और अध्यक्ष एक वैधानिक प्राधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। जजों के आचरण पर चर्चा नहीं की जा सकती।

अधिवक्ता सिब्बल ने कानूनी पहलुओं को सामने रखते हुए तर्क दिया कि जजों का पैनल महाभियोग की सिफारिश नहीं कर सकता, क्योंकि यह पूरी तरह से संसद के अधिकार क्षेत्र में है। जो कुछ भी हुआ है वह पूरी तरह से संविधान के विरुद्ध है। टेप जारी करना, उसे वेबसाइट पर अपलोड करना, जनता में रोष, सार्वजनिक चर्चा, मीडिया से बातचीत, जज पर आरोप, जज के आचरण पर जनता द्वारा चर्चा - ये सब निषिद्ध है। यही सवाल उठता है, प्रक्रिया राजनीतिक हो गई। रिपोर्ट के निष्कर्षों के जारी होने से प्रक्रिया का राजनीतिकरण हो गया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद बेंच ने यह भी कहा कि आंतरिक समिति द्वारा की गई जांच में भाग लेने के बाद याचिकाकर्ता इन मुद्दों को नहीं उठा सकता। बेंच ने याचिकाकर्ता से सवाल करते हुए पूछा, आप समिति के समक्ष क्यों उपस्थित हुए? आप एक संवैधानिक प्राधिकारी हैं, आप यह नहीं कह सकते कि मुझे नहीं पता। अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि उन्होंने समिति के समक्ष ये मुद्दे उठाए हैं। अधिवक्ता सिब्बल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से याचिकाकर्ता को हटाने की सिफारिश करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आंतरिक प्रक्रिया के अनुसार, किसी जज को हटाने की सिफारिश करना चीफ जस्टिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से ये सवाल पूछा

बेंच ने याचिकाकर्ता जस्टिस वर्मा से पूछा, क्या आप वीडियो हटाने का अनुरोध करने अदालत आए थे? आपने जांच पूरी होने और रिपोर्ट जारी होने का इंतज़ार क्यों किया? जब समिति नियुक्त की गई थी, तब आपने चुनौती क्यों नहीं दी? आपने इंतज़ार क्यों किया? जज पहले भी इन कार्यवाहियों में शामिल होने से बचते रहे हैं। आप पहले भी हमसे संपर्क कर सकते थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सिब्बल ने जवाब दिया, चूंकि यह सब सार्वजनिक था, हमे लगा कि समिति पता लगा लेगी कि यह कैश किसकी है। मामले की सुनवाई के बाद बेंच ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से आंतरिक समिति की रिपोर्ट रिकार्ड पर रखने कहा। रिट याचिका की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

Read MoreRead Less

Next Story