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Supreme Court on Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा जवाब, 'संदिग्ध नागरिकता' के आधार पर कितने वोटरों के नाम हटे? जानिए क्या है मामला

Supreme Court on Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग से पूछा- क्या संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए हैं?

Supreme Court on Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा जवाब, संदिग्ध नागरिकता के आधार पर कितने वोटरों के नाम हटे? जानिए क्या है मामला
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By Ragib Asim

नई दिल्ली 16 जनवरी 2026। वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने जानना चाहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) अभियान के दौरान क्या 'संदिग्ध नागरिकता' के आधार पर भी वोटर्स के नाम हटाए गए हैं और अगर हां,तो कितने नाम इस वजह से लिस्ट से बाहर किए गए हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग अब तक वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सिर्फ तीन वजहें बता रहा है मौत, डुप्लीकेशन और माइग्रेशन। ऐसे में सवाल ये है कि क्या 'संदिग्ध नागरिकता' भी कोई अलग कैटेगरी है या नहीं?

जमीनी हकीकत जानना चाहते हैं– सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर वकील राकेश द्विवेदी से कहा कि अदालत सिर्फ कागजी जवाब नहीं बल्कि नाम हटाने की असली प्रक्रिया की जमीनी हकीकत समझना चाहती है। बेंच ने पूछा- क्या संदिग्ध नागरिकता के आधार पर भी वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए हैं? इस पर द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि वह इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से निर्देश लेकर जानकारी देंगे।

नागरिकता तय करने का अधिकार किसके पास?

चुनाव आयोग की तरफ से यह भी कहा गया कि आयोग का अधिकार सिर्फ वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन तक सीमित है। द्विवेदी ने कहा कि चुनाव आयोग किसी को देश से बाहर नहीं भेज सकता, यह तय नहीं कर सकता कि किसी के पास भारत में रहने का वीजा है या नहीं, आयोग केवल यह देखता है कि कोई व्यक्ति वोटर बनने के योग्य है या नहीं यानी नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है।

ADR की दलील: यही सबसे बड़ा सवाल है

याचिकाकर्ता NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वोट देने के लिए नागरिकता जरूरी है, इस पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन असली सवाल ये है कि क्या चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार है भी या नहीं? उनका कहना था कि अगर यह अधिकार नहीं है तो सिर्फ शक के आधार पर नाम हटाना गंभीर संवैधानिक मुद्दा बन जाता है।

केरल वोटर लिस्ट पर बड़ा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि केरल में SIR प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उन्हें सार्वजनिक किया जाए। कोर्ट का तर्क था- अगर नाम हटाए गए हैं तो प्रभावित वोटर्स को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलना चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि आपत्ति दर्ज कराने की डेडलाइन दो हफ्ते के लिए बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि डेडलाइन बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट केरल में किए गए SIR प्रोसेस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग के अगले जवाब पर है क्या सच में 'संदिग्ध नागरिकता' के आधार पर नाम हटे हैं या यह सिर्फ एक आशंका है?

Ragib Asim

Ragib Asim News Editor, NPG News Ragib Asim is the News Editor at NPG News with over 15 years of experience across print, television, and digital journalism. He began his career with Hindustan in 2011 and has worked with Jain TV, TV One, NewsTrack, Special Coverage, Janjwar, and The Hans India. He studied Mass Communication at Jamia Millia Islamia, holds a Master’s degree in Political Science from the University of Delhi, and has pursued Islamic Studies at Nadwatul Ulama. Ragib is proficient in Urdu, Hindi, Arabic, and English. His reporting and editorial work focuses on politics, geopolitics, current affairs, crime, business, technology, education, automobiles, and careers, with a strong specialization in SEO-, AEO-, and GEO-driven news strategy. Contact: [email protected]

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