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Supreme Court: आदिवासी- ईसाइयों के शव कब्र से निकालने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार को आदेश...

Supreme Court : आदिवासी- ईसाइयों के शव को कब्र से खोदकर निकालने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित करते हुए कहा कि जनहित याचिका के अंतिम फैसले तक यह अंतरिम रोक जारी रहेगी। इस दौरान कब्र खोदकर लाश बाहर नहीं निकाली जाएगी।

Supreme Court: आदिवासी- ईसाइयों के शव कब्र से निकालने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार को आदेश...
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

नई दिल्ली|18 फरवरी 2026: आदिवासी- ईसाइयों के शव को कब्र से खोदकर निकालने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित करते हुए कहा कि जनहित याचिका के अंतिम फैसले तक यह अंतरिम रोक जारी रहेगी। इस दौरान कब्र खोदकर लाश बाहर नहीं निकाली जाएगी। याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह आदेश जारी किया है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

जनहित याचिका में कहा है, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरित आदिवासी ईसाइयों को अपने गांव की सीमा के भीतर मृत परिजनों के शव दफनाने से रोका जा रहा है, जबकि दूसरे समुदायों को ऐसा करने की अनुमति है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि, कुछ मामलों में उनके परिजनों के शवों को उनकी जानकारी के बिना कब्र से निकाल लिया गया और गांव से दूर दूसरी जगह दफनाने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने पीठ को बताया, प्रशासन कथित रूप से इस कार्रवाई का समर्थन कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दफनाए गए शवों को और नहीं निकाला जाएगा। जब तक अंतिम फैसला नहीं सुनाया जाता, तब तक किसी भी तरह की जबरन खुदाई या शवों को स्थानांतरित करने की कार्रवाई नहीं हो सकती।

जनहित याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर किया गया है। याचिका मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

पुराने फैसले का दिया हवाला

जनहित याचिका में पुलिस की शिकायत करते हुए बताया है, एक पुराने मामले के फैसले का हवाला देकर पुलिस कार्रवाई कर रही है। मामला रमेश बघेल बनाम स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ का था। इसमें एक ईसाई व्यक्ति ने अपने पिता, जो एक पादरी थे, उनके शव को अपने मूल गांव चिंडवाड़ा के कब्रिस्तान या अपनी निजी कृषि भूमि में दफनाने की अनुमति मांगी थी।

उस मामले में जस्टिस बीवी नागरत्ना ने निजी जमीन पर दफनाने की अनुमति दी थी, जबकि जस्टथ्स सतीश चंद्र शर्मा ने कहा था कि, दफन केवल उस स्थान पर किया जा सकता है, जो ईसाइयों के लिए निर्धारित है, जो कथित तौर पर कर्कापाल गांव में है। मूल गांव से लगभग 20-25 किलोमीटर दूर बताया गया।

याचिकाकर्ता ने पीआईएल में क्या कहा?

जनहित याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि धर्म, जाति या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति की परवाह किए बिना हर व्यक्ति को अपने गांव में अपने मृत परिजनों को दफनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने मांग की है, राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया जाए कि वे हर गांव में सभी समुदायों के लिए दफनाने की जगह चिन्हित करें और वहां अंतिम संस्कार की अनुमति दें।

यह जानना भी जरुरी

बड़े तेवड़ा और आमाबेड़ा इलाके में बने तीन चर्च और प्रार्थना सभा भवनों में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थी । गुस्साई भीड़ ने सरपंच के घर में भी तोड़फोड़ की। स्थिति संभालने पहुंची पुलिस भी हिंसा की शिकार हो गई थी।

पथराव और झड़प के दौरान एडिशनल एसपी, डीआईजी, एसआई, एएसआई समेत 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि हजारों की भीड़ आमाबेड़ा तक पहुंच गई और वहां भी एक चर्च में आग लगा दी थी।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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