Railway Halal vs Jhatka Controversy : रेलवे की थाली में झटका बनाम हलाल : मानवाधिकार आयोग ने रेलवे बोर्ड को थमाया नोटिस, पूछा- यात्रियों को क्यों नहीं मिल रहा विकल्प? पढ़े पूरी खबर

Railway Halal vs Jhatka Controversy : रेलवे की थाली में झटका बनाम हलाल : मानवाधिकार आयोग ने रेलवे बोर्ड को थमाया नोटिस, पूछा- यात्रियों को क्यों नहीं मिल रहा विकल्प? पढ़े पूरी खबर
Railway Halal vs Jhatka Controversy : नई दिल्ली : भारतीय रेलवे के खान-पान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, अब मामला केवल खाने के स्वाद का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और पसंद के अधिकार का बन गया है, एक सिख समुदाय के शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में सख्त और कड़ा रुख अपनाया है, आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा नियामक और संस्कृति मंत्रालय को नोटिस जारी कर इस पूरे मुद्दे पर जवाब मांगा है
Railway Halal vs Jhatka Controversy : क्या है असली विवाद
पूरा विवाद रेलवे में परोसे जाने वाले नॉन-वेज यानि मांसाहार खाने को लेकर है, सिख समुदाय का आरोप है की रेलवे में यात्रियों को केवल हलाल मीट परोसा जा रहा है सिख धर्म की मान्यताओं के अनुसार, उनके लिए हलाल मांस खाना वर्जित है, उनकी मांग है की रेलवे को दूसरा झटका विकल्प भी देना चाहिए, आयोग का कहना है की अगर यात्रियों को यह नहीं बताया जा रहा की उन्हें किस तरह का मीट परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है
पारदर्शिता और जानकारी की मांग
मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर स्पष्ट कहा की ग्राहकों को यह जानने का पूरा हक है की उनकी थाली में क्या है, आयोग ने संस्कृति मंत्रालय को निर्देश देने को कहा है की सभी होटलों और खाने-पीने की जगहों पर यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि मीट हलाल है या झटका इसके अलावा FSSAI से भी कहा गया है की खाने के पैकेट या सर्टिफिकेशन में इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से खाना खा सके
रोजगार में भेदभाव का भी उठा मुद्दा
इस विवाद में एक और गंभीर पहलू सामने आया है जो रोजगार का, आयोग का कहना है की हलाल की शर्तों के मुताबिक, पशु की बलि केवल एक विशेष समुदाय का व्यक्ति ही दे सकता है, इससे दूसरे समुदायों, खासकर हिंदू दलित वर्ग के उन लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ जायेगा है जो लम्बे समय से इस काम को करते आ रहे हैं, आयोग ने कहा ये आर्थिक भेदभाव का मुद्दा है
विदेशों का दिया उदाहरण
आयोग ने उदाहरण दिया की जब मुस्लिम देशों की एयरलाइंस जैसे एतिहाद एयरवेज अपने यात्रियों को हलाल और झटका दोनों तरह के भोजन का विकल्प दे सकते हैं, तो भारतीय रेलवे में ऐसी पारदर्शिता क्यों नहीं हो सकती, आयोग का मानना है की खाने के विकल्प उपलब्ध न कराना न केवल धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है, बल्कि यह उपभोक्ता के अधिकारों को भी ठेस पहुँचाने जैसा है

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.
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