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प्रमोशन में आरक्षण: अब कोर्ट के फैसले पर टिकी उम्मीदें… हजारों कर्मचारियों की पदोन्नति का भविष्य तय करेगा HC… क्या बदलेंगे नियम?

MP Promotion Reservation Case: मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news

By Chitrsen Sahu

जबलपुर 18 फरवरी 2026, मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया गया कि हर विभाग में प्रमोशन के लिए कमेटी बनाई जाएगी। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की उम्मीदें कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।

कौन सी याचिका से जुड़ा है मामला ?

दरअसल, यह मामला राज्य सरकार की नई प्रमोशन पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा हुआ है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ती विनय सराफ की युगलपीठ ने 17 फरवरी को प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी की। इसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

राज्य सरकार ने क्या स्पष्टीकरण दिया ?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण दिया कि हर विभाग में प्रमोशन के लिए कमेटी बनाई जाएगी। इन कमेटियों की जिम्मेदारी होगी कि आरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्य सरकार ने यह भी कहा कि जो आरक्षित वर्ग के अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन हासिल किए हैं, उनकी गणना उनके वर्ग में ही की जाएगी। SC और ST की 16 और 20 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

कैसे कोर्ट पहुंचा ये मामला ?

जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश सरकार ने साल 2002 में लोक सेवा प्रमोशन के नियम बनाते हुए प्रमोशन में आरक्षण लागू किया था। इसके बाद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता रहा, लेकिन अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों के अवसर प्रभावित हो गए और सेवा संरचना में असंतुलन पैदा हो गया। मामला तूल पकड़ते हुए कोर्ट तक जा पहुंचा।

क्यों लगी थी प्रमोशन पर रोक ?

जिसके बाद कोर्ट में सुनवाई के दौरान तर्क रखा गया कि प्रमोशन का लाभ एक ही स्तर पर सीमित होना चाहिए, न कि हर स्तर पर। इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 में तर्कों पर विचार करते हुए लोक सेवा प्रमोशन नियम 2002 को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए, जिसके बाद से अब तक मध्यप्रदेश में प्रमोशन की प्रक्रिया रूकी हुई है।

कोर्ट के अंतिम आदेश पर क्यों टिकी उम्मीदें ?

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ती विनय सराफ की युगलपीठ ने 17 फरवरी को प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की उम्मीदें कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर उनकी सेवा शर्तों और भविष्य के प्रमोशन पर पड़ेगा।

Chitrsen Sahu

मेरा नाम चित्रसेन साहू है, मै साल 2017 से जर्नलिज्म के फील्ड पर हूं। मैने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री (BJMC) के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन (M.SC EM) किया है। MY NEWS 36, JUST 36 NEWS, RPL NEWS, INH24x7 NEWS, TV24 NEWS के बाद NPG NEWS में डेस्क एडिटर्स पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे क्राइम-राजनीतिक और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों पर खास इंटरेस्ट है।

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