एसीबी की बड़ी कार्रवाई, सचिवालय के अधिकारी को 6.37 लाख रिश्वत लेते किया गिरफ्तार, सरकारी फंड के मंजूरी के बदले माँगा था घुस
Maharashtra Bribery Case: महाराष्ट्र के मुंबई से रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है. महाराष्ट्र सचिवालय के अनुभाग अधिकारी ने अनुदान मंजूरी के लिए 6.37 लाख रुपये रिश्वत की मांग की. मुंबई के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) ने अनुभाग अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों को पकड़ा है.

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Mumbai Bribery Case: 6 अप्रैल 2026, महाराष्ट्र के मुंबई से रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है. महाराष्ट्र सचिवालय के अनुभाग अधिकारी ने अनुदान मंजूरी के लिए 6.37 लाख रुपये रिश्वत की मांग की. मुंबई के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) ने अनुभाग अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों को पकड़ा है.
सचिवालय के अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार
मामला नवी मुंबई के खारघर इलाके का है. एंटी-करप्शन ब्यूरो की टीम ने अर्थ एवं नियोजन विभाग के कक्ष प्रथम श्रेणी अधिकारी विलास लाड को 6.37 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों को पकड़ा है. अधिकारी विलास लाड ने ग्राम विकास से जुड़े फंड की मंजूरी सरपंच से रिश्वत की मांग की थी. इस कार्रवाई के बाद मंत्रालय में हड़कंप मच गया है.
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक़, विलास लाड दक्षिण मुंबई में स्थित राज्य सचिवालय में अर्थ एवं नियोजन विभाग में अनुभाग अधिकारी के पद पर तैनात हैं. एक गांव के सरपंच ने मुंबई भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो से विलास लाड के खिलाफ रिश्वत मांगने को लेकर शिकायत की थी.
सरपंच से की थी 6.37 लाख रुपये रिश्वत की मांग
शिकायतकर्ता के अनुसार, गाँव में विकास कार्य फण्ड के लिए सरपंच ने आवेदन किया था. इस सम्बन्ध में सरपंच की मुलाक़ात विलास लाड से हुई. विलास लाड ने फंड की मंजूरी दिलाने के बदले मोटी रकम की मांग की. अधिकारी ने सरपंच से करीब 6.37 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की.
एसीबी ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा
शिकायत के बाद 16 मार्च को एसीबी ने मामले की जांच कराई. जिसमे आरोप की पुष्टि हुई. जिसके बाद आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने का प्लान बनाया गया. प्लान के तहत एसीबी की टीम ने खारघर में अधिकारी विलास लाड को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया.
अधिकारी विलास लाड के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है. दूसरी तरफ सचिवालय में हुई खुलेआम रिश्वतखोरी और इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं.
