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Lohardaga school news : लोहरदगा के जर्जर स्कूल : खंडहरों में भविष्य, मौत के साए में बच्चो की पढ़ाई.....

Lohardaga school news : झारखंड के लोहरदगा जिले के गांवों में सरकारी स्कूलों की इमारतें बहुत पुरानी और खराब हो चुकी हैं. छतें टूट रही हैं और दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिससे बच्चों की जान को खतरा बना रहता है बारिश के समय कमरों में पानी भर जाता है, जिसके कारण बच्चे डर के साये में पढ़ने को मजबूर हैं. कई स्कूलों में तो बच्चे कमरों के अंदर बैठने के बजाय बाहर मैदान या बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

Lohardaga school news : लोहरदगा के जर्जर स्कूल : खंडहरों में भविष्य, मौत के साए में बच्चो की पढ़ाई.....
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Lohardaga school news : लोहरदगा के जर्जर स्कूल : खंडहरों में भविष्य, मौत के साए में बच्चो की पढ़ाई.....

By Uma Verma

Jharkhand Lohardaga school news : झारखंड : झारखंड के लोहरदगा जिले के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब है. जर्जर इमारतों की वजह से मासूम बच्चों की जान दांव पर लगी है. जिले के लगभग हर दूसरे-तीसरे स्कूल का यही हाल है जहां छात्र टूटती छत और दरकती दीवारों के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं हादसे के डर से कई स्कूलों में तो बच्चे क्लासरूम के अंदर नहीं जाते और बाहर कड़ी धूप और मौसम की मार झेलते हुए बरामदे या मैदान में बैठकर पढ़ रहे हैं जर्जर हो चुके इन स्कूलों की वजह से बच्चों और शिक्षकों में हमेशा डर बना रहता है लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है.

लोहरदगा के मसूरियाखाड़ गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में 42 बच्चे हैं जो हर दिन खौफ के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं साल 2008 में बने स्कूल के तीन कमरे अब पूरी तरह खंडहर हो चुके हैं हालत इतनी खराब है कि बच्चों के मासूम चेहरों पर साफ डर दिखता है उन्हें हर वक्त छत गिरने का खतरा सताता रहता है.

स्कूल के प्रिंसिपल कुंदन किसान का कहना है कि स्कूल की बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है. उन्होंने विभाग की मीटिंगों में अफसरों और इंजीनियरों को कई बार इस बारे में बताया, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ बरसात में स्कूल की छत से इतना पानी टपकता है कि कमरे तालाब बन जाते हैं छत का प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहा है यह तो किस्मत अच्छी है कि अब तक किसी बच्चे को चोट नहीं लगी, वरना कभी भी बड़ा हादसा हो सकता हैं.

लोहरदगा के सरकारी हाई स्कूल ठकुराइन डेरा में पहली से दसवीं तक की पढ़ाई होती है, लेकिन कमरे सिर्फ तीन ही हैं इन कमरों की हालत इतनी खराब है कि इन्हें स्कूल कहना मुश्किल है ये खंडहर बन चुके हैं बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें बरामदे या बाहर मैदान में बैठाकर पढ़ाया जाता है बारिश होते ही पढ़ाई बंद करनी पड़ती है जिससे अब यह चिंता बढ़ गई है कि आने वाले बरसात के दिनों में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी.

स्कूल की शिक्षिका रानी कुमारी का कहना है कि यह लोहरदगा के सबसे पुराने स्कूलों में से एक है जिसकी मरम्मत से काम नहीं चलेगा बल्कि इसे नए सिरे से बनाना जरूरी है. दसवीं तक की पढ़ाई के लिए सिर्फ तीन कमरे हैं जो यह बताने के लिए काफी है कि शिक्षा विभाग कितना लापरवाह और गैर-जिम्मेदार है वहीं पंचायत के मुखिया कामिल टोपनो का कहना है कि स्कूल की ऐसी हालत में बच्चों का भविष्य संवारना और पढ़ाई करना बहुत मुश्किल हो गया है.

तीसरी तस्वीर लोहरदगा के सरकारी प्राइमरी स्कूल परतू की है. नक्सल प्रभावित इलाके में मौजूद इस स्कूल की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी गिर सकती है. खतरे को देखते हुए अब यहाँ बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया गया है टीचर और गांव वाले मांग कर रहे हैं कि या तो इसकी मरम्मत होनी चाहिए या नया स्कूल बनाया जाना चाहिए.सरकारी स्कूलों की ये डरावनी तस्वीरें शिक्षा विभाग और सरकार के काम करने के तरीके पर बड़े सवाल खड़े करती हैं सिस्टम बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर आँखें मूंदे बैठा है.

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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