भारत में लॉकडाउन लगेगा या नही... आखिर क्या है सच? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया साफ
India Lockdown News: ईरान युद्ध के चलते लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फ़ैल रही है. सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कोविड-19 जैसे लॉकडाउन लग सकता है. इस पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट कर इसे अफवाह बताया है.

India Lockdown News: 27 मार्च 2026, मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण दुनियाभर में हाहाकार मचा है. LPG की दिक्कत के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गयी है. इसी बीच ईरान युद्ध के चलते लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फ़ैल रही है. सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कोविड-19 जैसे लॉकडाउन लग सकता है. इस पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट कर इसे अफवाह बताया है.
लॉकडाउन की अफवाह गलत
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर दो अलग अलग पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं. देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, "वैश्विक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, और हम ऊर्जा, सप्लाई चेन और ज़रूरी वस्तुओं से जुड़े हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में ईंधन, ऊर्जा और अन्य आवश्यक चीज़ों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे।. हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं.
भारत ने पहले भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी मज़बूती दिखाई है, और आगे भी हम समय पर, सक्रिय और समन्वित तरीके से कदम उठाते रहेंगे. लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं. मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें. इस तरह की स्थिति में अफवाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना और हानिकारक है.
दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'पिछले 1 महीने में इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो लगभग 70 डॉलर/बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर/बैरल हो गई हैं. नतीजतन, पूरी दुनिया में कंज्यूमर्स के लिए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ गई हैं. साउथ ईस्ट एशियाई देशों में कीमतें लगभग 30%-50%, नॉर्थ अमेरिकन देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% बढ़ गई हैं.
मोदी सरकार के पास दो ऑप्शन थे- या तो भारत के नागरिकों के लिए कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ा दें, जैसा कि दूसरे सभी देशों ने किया है या फिर अपने फाइनेंस पर इसका असर झेलें ताकि भारतीय नागरिक इंटरनेशनल उतार-चढ़ाव से बचे रहें. प्रधानमंत्री रूस-यूक्रेन में लड़ाई शुरू होने के बाद से पिछले 4 सालों से अपनी सरकार के वादे को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए फिर से अपने फाइनेंस पर असर डालने का फैसला किया.
सरकार ने अपने टैक्स रेवेन्यू पर भारी असर डाला है ताकि तेल कंपनियों का बहुत ज़्यादा नुकसान (पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपये/लीटर और डीज़ल के लिए 30 रुपये/लीटर) कम हो सके, जबकि इंटरनेशनल कीमतें आसमान छू रही हैं. साथ ही, एक्सपोर्ट टैक्स लगाया गया है क्योंकि पेट्रोल और डीज़ल की इंटरनेशनल कीमतें आसमान छू रही हैं और विदेशी देशों को एक्सपोर्ट करने वाली किसी भी रिफाइनरी को एक्सपोर्ट टैक्स देना होगा.
