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Indian Navy Submarine Accident: गोवा में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी मछली पकड़ने वाली नाव से टकराई, 2 मछुआरे लापता

Indian Navy Submarine Accident: भारतीय नौसेना की एक स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी 21 नवंबर की शाम गोवा तट से 70 समुद्री मील दूर मार्थोमा नामक मछली पकड़ने वाली नाव से टकरा गई है। भारतीय नौसेना ने इस घटना की जानकारी दी है।

Indian Navy Submarine Accident: गोवा में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी मछली पकड़ने वाली नाव से टकराई, 2 मछुआरे लापता
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By Ragib Asim

Indian Navy Submarine Accident: भारतीय नौसेना की एक स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी 21 नवंबर की शाम गोवा तट से 70 समुद्री मील दूर मार्थोमा नामक मछली पकड़ने वाली नाव से टकरा गई है। भारतीय नौसेना ने इस घटना की जानकारी दी है। नौसेना अधिकारियों के मुताबिक, टक्कर के वक्त मछली पकड़ने वाली नाव में चालक दल के 13 सदस्य सवार थे, जिनमें से 11 को बचा लिया गया है, लेकिन 2 अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

हादसे के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया है। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना के कम से कम 6 जहाज और विमानों को लगाया गया है। चालक दल के लापता 2 सदस्यों के लिए बचाव अभियान को समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) द्वारा समन्वित किया जा रहा है। साथ ही अभियान में तेजी लाने के लिए तटरक्षक बल के अतिरिक्त संसाधन भी क्षेत्र में भेजे गए हैं।

कैसी है स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बी?

स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पनडुब्बियां परंपरागत रूप से डीजल-इलेक्ट्रिक इंजनों से चलने वाली होती हैं। इनके खुफिया जानकारी एकत्र करना, माइन बिछाना और किसी क्षेत्र की निगरानी सहित कई तरह के मिशनों को अंजाम दिया जाता है। इनसे पानी के नीचे या सतह पर रहते हुए दुश्मनों पर हमला भी किया जा सकता है। भारत के पास स्कॉर्पीन श्रेणी की कुल 6 पनडुब्बियां हैं।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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