India–GCC FTA Deal 2026: 6 अरब देशों से ट्रेड डील क्यों है गेमचेंजर? भारत को क्या बड़ा फायदा होगा, जानिए इसका पूरा इम्पैक्ट
India GCC Trade Deal 2026: भारत ने गल्फ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) के साथ FTA बातचीत शुरू की। जानिए सऊदी अरब, UAE समेत 6 देशों से व्यापार समझौते से भारत को ऊर्जा, निवेश और रोजगार में क्या फायदा होगा।

नई दिल्ली 6 फरवरी 2026: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) के बीच भारत अपने व्यापारिक रिश्ते को तेजी से विस्तार दे रहा है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब भारत ने 6 अरब मुस्लिम देशों के समूह गल्फ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारत और GCC ने FTA के लिए संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference–ToR) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी।
सबसे पहले समझिए, GCC क्या है?
GCC खाड़ी क्षेत्र का एक अहम क्षेत्रीय अरब मुस्लिम समूह है जिसमें Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar, Kuwait, Oman और Bahrain शामिल हैं। इसकी स्थापना 1981 में हुई थी और इसका मुख्यालय सऊदी अरबिया के रियाद शहर में है। यह संगठन मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े समझौतों पर काम करता है।
भारत और GCC के बीच क्या सहमति बनी?
नई दिल्ली में हुए समझौते के तहत भारत और GCC ने FTA पर बातचीत शुरू करने के लिए ToR साइन किए हैं। इसमें यह तय किया गया है कि प्रस्तावित समझौते का दायरा क्या होगा, किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी और बातचीत का ढांचा कैसा रहेगा।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत और GCC के भू-राजनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, निवेश बढ़ाएगा और खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
भारत को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं?
भारत के लिए GCC के साथ FTA कई स्तरों पर फायदेमंद माना जा रहा है। एक तरफ इससे भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों की स्टेबल और लॉन्ग-टर्म सप्लाई सुनिश्चित हो सकती है। दूसरी ओर भारत के आईटी, पेट्रोकेमिकल, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर की कंपनियों को GCC बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। इसके अलावा भारत के कुशल युवा और प्रोफेशनल्स के लिए खाड़ी देशों में रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं।
भारत-GCC व्यापार कितना बड़ा है?
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और GCC देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 16 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें भारत का निर्यात (Export) लगभग 6 लाख करोड़ और आयात (Import) करीब 10 लाख करोड़ रुपये था। यह भारत के कुल वैश्विक व्यापार का करीब 15.4 प्रतिशत है।
GCC भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार समूह है। इनमें United Arab Emirates (UAE) भारत का सबसे बड़ा व्यक्तिगत ट्रेड पार्टनर है। भारत का यूएई के साथ पहले से ही FTA लागू है जबकि ओमान के साथ दिसंबर 2025 में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) साइन हो चुका है।
समय भी क्यों है अहम?
भारत और GCC के बीच यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर टैरिफ, सप्लाई चेन और भू-राजनीति को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। अमेरिका और EU के साथ हालिया व्यापार समझौतों के बाद GCC के साथ यह कदम भारत की 'मल्टी-एलाइंस ट्रेड स्ट्रैटेजी' को मजबूत करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे खाड़ी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव और बढ़ेगा।
कगुलासा यह है कि GCC के साथ प्रस्तावित FTA भारत के लिए सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, रोजगार और भू-राजनीतिक संतुलन से जुड़ा अहम कदम है। आने वाले महीनों में बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर भारत के पश्चिम एशिया संबंधों का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।
