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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : पत्नी को 1 थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं... जानिए कोर्ट ने किन सबूतों को माना आधार.

Gujarat High Court Verdict : गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पत्नी को बिना बताए मायके जाने पर पति द्वारा मारा गया एक थप्पड़ आईपीसी की धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने साफ किया कि छोटे-मोटे झगड़े हर घर में होते हैं और जब तक प्रताड़ना के ठोस सबूत न हों, तब तक इसे अपराध नहीं कहा जा सकता.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : पत्नी को 1 थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं... जानिए कोर्ट ने किन सबूतों को माना आधार.
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : पत्नी को 1 थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं... जानिए कोर्ट ने किन सबूतों को माना आधार.

By Uma Verma

Gujarat High Court Verdict : अहमदाबाद : रिश्तों में खींचतान और छोटी-मोटी नोकझोंक क्या अपराध की श्रेणी में आती है. इस पर गुजरात हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति अपनी पत्नी को किसी बात पर एक थप्पड़ मार देता है, तो उसे आईपीसी की धारा 498ए के तहत कानूनी क्रूरता नहीं माना जा सकता. इसी आधार पर कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है.

क्या था 28 साल पुराना यह मामला

यह कानूनी लड़ाई साल 1996 में शुरू हुई थी. वलसाड जिले के सरीगाम पहाड़पाड़ा में रहने वाले दिलीपभाई मंगलाभाई वरली की शादी को करीब एक साल ही हुआ था, जब उनकी पत्नी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. पुलिस ने पति के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ना का मामला दर्ज किया. गवाहों और शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि दिलीप अक्सर वाद्य यंत्र बजाने के लिए म्यूजिकल प्रोग्राम में रात भर बाहर रहते थे, जो उनकी पत्नी को पसंद नहीं था. इसी बात को लेकर अक्सर दोनों के बीच सामान्य अनबन होती थी.

एक थप्पड़ और 7 साल की सजा

मामले में एक मोड़ तब आया जब यह पता चला कि एक बार पत्नी बिना बताए अपने मायके चली गई थी और वहां रात भर रुक गई थी. इस बात से नाराज होकर दिलीप ने उसे एक थप्पड़ मारा था. वलसाड की निचली अदालत ने इसे गंभीर प्रताड़ना मानते हुए साल 2003 में दिलीप को दोषी करार दिया और उन्हें 7 साल की कड़ी सजा सुना दी. दिलीप ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद यह मामला जस्टिस गीता गोपी की बेंच के पास पहुंचा.

हाईकोर्ट की टिप्पणी : क्रूरता के लिए ठोस सबूत जरूरी

हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गहराई से जांच की और अभियोजन पक्ष की दलीलों को कमजोर पाया. कोर्ट ने कहा कि क्रूरता साबित करने के लिए लगातार और असहनीय शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न के सबूत होने चाहिए. महज एक बार हाथ उठाना या सामान्य घरेलू झगड़ा क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता.

जस्टिस गीता गोपी ने अपने फैसले में कहा, बिना बताए मायके में रात भर रुकने पर पति द्वारा मारा गया एक थप्पड़ कानूनी तौर पर क्रूरता नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी के कृत्य और मौत के बीच सीधा संबंध होना चाहिए, जो इस केस में कहीं नजर नहीं आया.

23 साल बाद मिला इंसाफ

अदालत ने माना कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद सामान्य वैवाहिक अनबन था, जो लगभग हर घर में होते हैं. रिकॉर्ड में ऐसा कोई मेडिकल साक्ष्य या पुरानी शिकायत नहीं थी जो पति को अपराधी साबित कर सके. आखिरकार, 23 साल के लंबे इंतजार के बाद दिलीप को निर्दोष घोषित कर दिया गया और उनकी सजा रद्द कर दी गई.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2025 कमल बनाम गुजरात राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े फैसले में साफ किया था कि शादीशुदा जिंदगी में होने वाली छोटी-मोटी नोकझोंक या तानों को क्रूरता नहीं माना जा सकता. कमल बनाम गुजरात राज्य मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि परिवार में कभी-कभार होने वाली अनबन जीवन का एक सामान्य हिस्सा है. अगर पत्नी अपने पति या ससुराल वालों पर बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाती है, तो उसे आईपीसी की धारा 498A के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा.

इस मामले में पत्नी ने अपने ससुराल वालों पर प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था, लेकिन जांच के दौरान कोर्ट ने पाया कि ये आरोप मनगढ़ंत थे और इनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं था. अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कानून का इस्तेमाल किसी को बेवजह परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए. कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया था कि जब तक गंभीर शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न के पुख्ता प्रमाण न हों, तब तक मामूली कहासुनी को आधार बनाकर किसी परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती.

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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