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Oil Crisis Explainer: 1970 के तेल संकट से कितना भयानक है आज का ऊर्जा संकट? महा-मंदी और महंगाई की चेतावनी, जानें हर सवाल का जवाब

Oil Crisis Explainer: ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण होर्मुज जलमार्ग बंद होने से दुनिया 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई कट का सामना कर रही है। जानें 1970 के तेल संकट और आज के हालात में क्या फर्क है।

Oil Crisis Explainer: 1970 के तेल संकट से कितना भयानक है आज का ऊर्जा संकट? महा-मंदी और महंगाई की चेतावनी, जानें हर सवाल का जवाब!
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फोटो: AI 

By Ragib Asim

नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट (Middle East) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई (Global Energy Supply) को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का 20 प्रतिशत हिस्सा जिस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) जलमार्ग से होकर गुजरता है वह पिछले एक महीने से लगभग बंद है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के निदेशक फातिह बिरोल और शिपिंग एक्सपर्ट लार्स जेन्सेन जैसे दिग्गजों ने चेतावनी दी है कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे का सामना कर रही है। यह संकट 1970 के दशक के ऐतिहासिक 'ऑयल क्राइसिस' (Oil Crisis) से भी ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है। आइए इस एक्सप्लेनर (Explainer) के जरिए समझते हैं कि 1970 के दशक का तेल संकट क्या था और आज के हालात उससे कितने अलग और खतरनाक हैं।

1970 के दशक का ऐतिहासिक तेल संकट क्या था?

1970 के दशक में दुनिया को ऊर्जा के मोर्चे पर दो बड़े झटके लगे थे जिन्होंने पहली बार यह साबित किया कि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं कच्चे तेल पर कितनी निर्भर हैं:

1973 का तेल प्रतिबंध (Oil Embargo)

'योम किप्पुर युद्ध' के दौरान, ओपेक (OPEC) के अरब देशों ने अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने वाले देशों पर तेल निर्यात रोक दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही महीनों में ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ गईं। अमेरिका और ब्रिटेन भयंकर मंदी (Recession) की चपेट में आ गए।

1979 की ईरानी क्रांति (Iranian Revolution)

ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के कारण वहां तेल का उत्पादन ठप हो गया। इस घटना ने बाजार में 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) पैदा की और कीमतें फिर से दोगुनी हो गईं।

मौजूदा (मार्च 2026) का तेल संकट

नैटिक्सिस सीआईबी (Natixis CIB) की मुख्य अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया हेरेरो के अनुसार होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से आज दुनिया की 20% आपूर्ति सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। यह आंकड़ा 1970 के दशक को बौना साबित कर देता है। यह सिर्फ कच्चे तेल की ही कमी नहीं है बल्कि प्राकृतिक गैस (Natural Gas) और रिफाइंड उत्पादों का भी संकट है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सप्लाई बहाल करने के लिए सहयोगियों से युद्धपोत भेजने की अपील की है और ईरान को धमकियां दी हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कल होर्मुज जलमार्ग खुल भी जाए तो भी सप्लाई चेन को नार्मल होने और ऊर्जा लागत कम होने में 6 से 12 महीने लगेंगे।

क्या आज भारत 1970 के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं?

इस सवाल पर एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है। डॉ. कैरोल नखले और डॉ. टियरनैन हीनी का तर्क है कि आज दुनिया के पास ऐसे झटकों को सहने का 'बफर' (Buffer) है:

  • सुरक्षित भंडार (Strategic Reserves): आज कई देशों के पास बड़े आपातकालीन तेल भंडार हैं, जो 1970 के दशक में नहीं थे।
  • विविधता (Diversity): आज ऊर्जा बाजार अधिक विविध है और दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं केवल तेल पर निर्भर नहीं हैं।

भले ही आज हमारे पास बेहतर सुरक्षित भंडार हैं लेकिन रुकी हुई 20 प्रतिशत सप्लाई का पैमाना इतना बड़ा है कि इसका कोई क्विक समाधान नहीं है। अगर यह युद्ध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो दुनिया को कीमतों में भारी उछाल, भयंकर महंगाई और खासकर आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर एशियाई देशों को गहरी मंदी का सामना करना पड़ेगा।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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