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Ghazipur Landfill Fire: गाजीपुर ‘लैंडफिल’ में लगी आग, अब तक नहीं पाया गया काबू, जहरीली हवा में सांस लेना हुआ मुश्किल

Ghazipur Landfill Fire: पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट पर रविवार शाम भीषण आग लग गई। आग लगने की सूचना प्राप्त होते ही दमकल विभाग की 10-12 गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं।

Ghazipur Landfill Fire: गाजीपुर ‘लैंडफिल’ में लगी आग, अबतक नहीं पाया गया काबू, जहरीली हवा में सांस लेना हुआ मुश्किल
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By Ragib Asim

Ghazipur Landfill Fire: पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट पर रविवार शाम भीषण आग लग गई। आग लगने की सूचना प्राप्त होते ही दमकल विभाग की 10-12 गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं। आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है और पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घेराबंदी के साथ सड़क की सफाई कर दी गई है ताकि दमकल की गाड़ियां आसानी से आ सकें। अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है और साथ ही सुबह तक आग पर काबू पा लिया जाएगा।

धुंए सांस लेना हुआ मुश्किल हो गया है। गाजीपुर लैंडफिल साइट में आग लगने के बाद धुएं से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्हें धुंए के कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही है और धुएं का बुजुर्गों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा।

दिल्ली मेयर, डिप्टी मेयर ने दिए निर्देश। गाजीपुर लैंडफिल साइट में आग लगने की जानकारी प्राप्त करते ही दिल्ली के डिप्टी मेयर इकबाल घटनास्थल पर पहुंचे और स्थल का निरीक्षण किया। इसके साथ अधिकारियों को आग पर जल्द से जल्द काबू पाने के निर्देश भी दिए गए हैं। दिल्ली मेयर शैली ओबेरॉय ने एक पोस्ट में कहा कि "गाजीपुर लैंडफिल साइट के एक छोटे से हिस्से में आग लग गई है। निर्देशों के अनुसार, सभी अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और सब कुछ नियंत्रण में है।"

गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कब-कब आग लगी

जानकारी के मुताबिक, एमडीसी की गाजीपुर एसएलएफ करीब 70 एकड़ में फैली हैं जो साल 1984 में अस्तित्व में आई थी। इसके बाद से धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई 65 मीटर तक पहुंच गई जिसकी वजह से पिछले कुछ सालों से यह हादसों की साइट भी बन गई है।

साल 2017 में हुआ था हादसा

बात अगर साल 2017 की करें तो सितंबर महीने में दोपहर के वक्त इस साइट का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट गया था। इस दौरान सड़क और नहर के साथ से गुजर रहे कई वाहन इसके मलबे की चपेट में आ गए थे। इसकी वजह से दो लोगों की मौत भी हो गई थी जिसमें एक स्कूटी सवार लड़की और एक महिला शामिल थीं। साइट के पास की नहर में 3-4 कारें भी जा गिरीं थीं। इसके बाद एनडीआरएफ और दिल्ली पुलिस के अलावा दूसरी टीमों ने रेस्क्यू अभियान चलाया था और 5 लोगों की जान बचाई गई थी। इसके बाद दिल्ली की सियासत खूब गरमाई और बड़े-बड़े दावे बीजेपी, आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से किए गए।

साल 2020 में लगी थी आग

हैरान करने वाली बात यह है कि इस हादसे के 3 साल बाद 2020 में फिर इस साइट पर आग लगने की घटना सामने आई और यह आग करीब 5 दिनों तक नहीं बुझ पाई। इससे निकलने वाले जहरीले धुंए ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। फिर खूब दावे और वादे किए गए। इसके बाद मार्च 2022 में गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े में आग लगने की घटना हुई। 28 मार्च को गाजीपुर लैंडफिल साइट के ऊपरी हिस्से में आग लगी थी जिसे 3 दिन तक बुझाने का काम किया गया था। लेकिन आग पर काबू नहीं किया जा सका। आग लगने के चौथे दिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पीछे हट गईं और बुलडोजर से उस हिस्से को ढहाने का काम किया गया जिससे आग तो नहीं बुझ पाई। आग मलबे में दब गई।

प्राइवेट कंपनी को सौंपा था प्रोसेसिंग का जिम्मा

एमसीडी की माने तो अब गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए 2026 की डेडलाइन तय की गई है। इस साइट के कूड़े को लेकर साल 2019 में एक सर्वे कराया गया था जिसमें 1.40 लाख मीट्रिक टन कूड़ा होने का अनुमान लगाया गया था। इसके बाद इसके कूड़े को खत्म करने के लिए 2024 डेडलाइन तय की गई थी। निगम ने इस कूड़े को प्रोसेस करने का जिम्मा एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा था।

गाजीपुर साइट पर प्रोसेसिंग के बाकी 80 लाख मीट्रिक टन कूड़ा को प्रोसेस करने के लिए एमसीडी ने 24 नवंबर 2022 को एक और कंपनी के साथ समझौता किया था। कंपनी की ओर से 18 महीने में 30 लाख मीट्रिक टन कूड़ा प्रोसेस करने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन कंपनी इस टारगेट के आसपास भी नहीं पहुंच पाई। मौजूदा समय में गाजीपुर साइट पर करीब 80 लाख मीट्रिक टन कूड़ा बाकी है जिसे हटाने के काम किया जाना है। इसके लिए अब एमसीडी ने नई डेडलाइन 2026 तय की है।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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