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Four Stars of Destiny Controversy: कौन हैं जनरल एम.एम. नरवणे, जिनकी अनपब्लिश्ड बुक Four Stars of Destiny क्यों बरपा है हंगामा! जानिए किताब में चीन पर क्या लिखा है?

General MM Naravane Controversy: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब को लेकर संसद से लेकर सियासत तक हलचल मची हुई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण...

Four Stars of Destiny Controversy: कौन हैं जनरल एम.एम. नरवणे, जिनकी अनपब्लिश्ड बुक Four Stars of Destiny क्यों बरपा है हंगामा! जानिए किताब में चीन पर क्या लिखा है?
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By Ragib Asim

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब को लेकर संसद से लेकर सियासत तक हलचल मची हुई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान इस किताब के अंश पढ़े जाने पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई जिसके बाद सदन में भारी हंगामा देखने को मिला।

विवाद की जड़ एक अप्रकाशित आपबीती किताब "फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी" है जिसे जनरल नरवणे ने लिखा है। राहुल गांधी ने कहा कि यह किताब सरकार की अनुमति न मिलने के कारण अब तक प्रकाशित नहीं हो सकी और इसमें ऐसे तथ्य हैं जिन्हें सामने आने से रोका जा रहा है। भाजपा नेताओं का तर्क था कि किसी अप्रकाशित किताब के अंश संसद में पढ़ना नियमों के ख़िलाफ़ है।

किताब को लेकर विवाद क्यों?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन भारतीय सेना ने इसकी आंतरिक जांच शुरू कर दी। जांच पूरी होने तक प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को किताब की सॉफ़्ट कॉपी या अंश सार्वजनिक न करने को कहा गया। इस प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय की भूमिका भी बताई गई थी।

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार किताब में 2020 के पूर्वी लद्दाख सैन्य गतिरोध, गलवान घाटी की झड़प और अगस्त 2020 में हुई उच्चस्तरीय बैठकों का उल्लेख है। इन्हीं अंशों पर अब राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में राहुल गांधी ने दावा किया कि वे किताब से केवल कुछ पंक्तियां पढ़ना चाहते थे, लेकिन सत्ता पक्ष डर के कारण इसकी इजाज़त नहीं दे रहा। इसके जवाब में सत्ता पक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर संसद में ऐसे अंश पढ़ना अनुचित है खासकर जब किताब अभी आधिकारिक तौर पर प्रकाशित ही नहीं हुई है।

कौन हैं जनरल एमएम नरवणे

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के 28वें प्रमुख रहे। उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था और चीन के साथ लद्दाख में तनाव चरम पर था। 2020 का गलवान घाटी संघर्ष उनके कार्यकाल का सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर माना जाता है।

पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल से पढ़ाई करने वाले नरवणे ने एनडीए खड़कवासला और इंडियन मिलिट्री एकेडमी से प्रशिक्षण लिया। वे पूर्वी कमान के प्रमुख, दिल्ली एरिया के जीओसी और श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय शांति सेना का हिस्सा भी रह चुके हैं।

किताब में क्या बताया गया है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, किताब में 31 अगस्त 2020 की एक अहम रात का ज़िक्र है, जब चीन के साथ सैन्य तनाव अपने निर्णायक मोड़ पर था। इसमें रणनीतिक फैसलों, राजनीतिक-सैन्य संवाद और सेना की बदली हुई रणनीति का विवरण बताया गया है। कुछ हिस्से 2023 में न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के ज़रिए सामने भी आ चुके हैं।

सम्मान और उपलब्धियां

जनरल नरवणे को सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। उनके कार्यकाल में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हथियार खरीद परियोजनाओं को गति मिली और एनडीए में महिलाओं के लिए प्रवेश का ऐतिहासिक फैसला लिया गया।

फिलहाल किताब की जांच पूरी नहीं हुई है और न ही इसके प्रकाशन की कोई नई तारीख सामने आई है। ऐसे में यह विवाद सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सेना, राजनीति और अभिव्यक्ति की सीमा जैसे बड़े सवालों से भी जुड़ गया है।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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